योग्यता बनी पहचान, बिना सिफारिश मिली नौकरी: सीएम योगी ने 481 युवाओं को बांटे नियुक्ति पत्र

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का दावा, बोले- अब यूपी में सिर्फ मेरिट का सम्मान

लखनऊ, 07 मई। उत्तर प्रदेश में सरकारी भर्तियों को पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के दावे के बीच मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने गुरुवार को आयुष विभाग, व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग तथा दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के लिए चयनित 481 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रदेश में सरकारी नौकरियां बिना सिफारिश और बिना भ्रष्टाचार के केवल योग्यता के आधार पर दी जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के “मिशन रोजगार” अभियान के तहत प्रदेश सरकार लगातार नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित कर रही है और अब तक 9 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया इतनी पारदर्शी बनाई गई है कि परीक्षा के बाद भी किसी स्तर पर सिफारिश या अनैतिक साधनों के इस्तेमाल की कोई गुंजाइश नहीं बची।

सीएम योगी ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में भर्तियां “पैसा, जाति, मत, मजहब और क्षेत्र” देखकर होती थीं, जिससे योग्य युवाओं का शोषण होता था। उन्होंने कहा कि यदि किसी योग्य अभ्यर्थी की जगह भ्रष्ट व्यक्ति व्यवस्था में आ जाए तो वह वर्षों तक पूरे सिस्टम को खोखला कर देता है। इसी सोच के साथ उनकी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया से भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसी संभावनाओं को समाप्त करने का संकल्प लिया।

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि जवाबदेही, तकनीक और पारदर्शिता के कारण उत्तर प्रदेश आज देश में सबसे अधिक नियुक्तियां देने वाला राज्य बन गया है। उन्होंने बताया कि पिछले 15 दिनों में यह चौथा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम है।

“यूपी की बदली पहचान”

सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की पहचान भ्रष्टाचार, गुंडागर्दी और अराजकता वाले प्रदेश के रूप में हो चुकी थी, लेकिन अब प्रदेश की छवि तेजी से बदली है। उन्होंने कहा कि आज यूपी देश की अर्थव्यवस्था का “ग्रोथ इंजन” बन चुका है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय, बजट और अर्थव्यवस्था तीन गुना बढ़ी है और यूपी अब देश के टॉप-3 राज्यों में शामिल हो गया है।

एमएसएमई और उद्योगों पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयों में 3 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। पिछले वर्ष 4000 से अधिक बड़े उद्योग यूपी में आए, जबकि बीते 9 वर्षों में बड़े उद्योगों की संख्या 14 हजार से बढ़कर 32 हजार से अधिक हो गई है।

आयुष और स्किल डेवलपमेंट पर विशेष फोकस

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने आयुष क्षेत्र को हेल्थ टूरिज्म का बड़ा माध्यम बताते हुए कहा कि आयुष के जरिए गांव-गांव तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा सकती हैं। इस दौरान आयुष विभाग के 202 प्राध्यापक, चिकित्सा अधिकारी और स्टाफ नर्सों को नियुक्ति पत्र दिए गए।

वहीं व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के तहत चयनित 272 प्रशिक्षित अनुदेशकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में बढ़ते निवेश के अनुरूप स्किल्ड मैनपॉवर तैयार करना समय की मांग है। उन्होंने बताया कि टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से 150 से अधिक आईटीआई संस्थानों को आधुनिक बनाया गया है, जहां एआई, ड्रोन टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, रोबोटिक्स और 3डी प्रिंटिंग जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

दिव्यांगजन सशक्तीकरण पर भी जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक दिव्यांगजन में प्रतिभा होती है, आवश्यकता केवल सही मंच देने की है। सरकार ने दिव्यांगजन पेंशन, विशेष विश्वविद्यालयों और कमिश्नरी स्तर पर विशेष केंद्रों की स्थापना जैसे कई कदम उठाए हैं।

इस अवसर पर राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल, नरेन्द्र कुमार कश्यप, डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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