संविधान के प्रथम संशोधन की उपयोगिता आज भी प्रासंगिक : न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता

ग्रेटर नोएडा। अधिवक्ता परिषद उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड द्वारा अधिकृत यूट्यूब चैनल एवं फेसबुक पेज के माध्यम से आयोजित ऑनलाइन व्याख्यानमाला में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता ने कहा कि संविधान के प्रथम संशोधन की उपयोगिता वर्तमान समय में भी पूरी तरह प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि मूल अधिकारों पर लगाए गए युक्तियुक्त प्रतिबंध तथा सामाजिक-आर्थिक सुधारों के लिए किए गए संशोधन देशहित में आवश्यक थे।

“संविधान के प्रथम संशोधन के 75 वर्ष पश्चात वर्तमान परिवेश में उसकी उपयोगिता” विषय पर आयोजित व्याख्यान में न्यायमूर्ति गुप्ता ने कहा कि 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के मात्र 16 माह बाद ही संविधान संशोधन की आवश्यकता महसूस हुई। उन्होंने बताया कि वर्ष 1950 में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए बृजभूषण बनाम दिल्ली राज्य और रमेश थापर बनाम मद्रास राज्य के निर्णयों ने प्रथम संविधान संशोधन की पृष्ठभूमि तैयार की।

उन्होंने कहा कि बृजभूषण मामले में उच्चतम न्यायालय ने प्रेस की स्वतंत्रता को बाधित करने वाले प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित किया, जबकि रमेश थापर मामले में वितरण संबंधी प्रतिबंधों को निरस्त किया गया। इसके बाद संविधान के प्रथम संशोधन के माध्यम से अनुच्छेद-19 के तहत वाक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर युक्तियुक्त प्रतिबंधों का प्रावधान किया गया।

न्यायमूर्ति गुप्ता ने अनुच्छेद 31(क) एवं 31(ख) तथा नवीं अनुसूची से जुड़े संशोधनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन प्रावधानों ने जमींदारी उन्मूलन जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक सुधारों का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने शंकरी प्रसाद, सज्जन सिंह, गोलकनाथ तथा केशवानंद भारती जैसे ऐतिहासिक मामलों का भी उल्लेख किया और संविधान के मूलभूत ढांचे के सिद्धांत की चर्चा की।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते हेट स्पीच के मामलों को देखते हुए प्रथम संविधान संशोधन की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है। व्याख्यान के दौरान उन्होंने प्रतिभागियों के प्रश्नों का भी विस्तार से उत्तर दिया।

कार्यक्रम का संचालन उत्तराखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अनिल जोशी ने किया। अधिवक्ता परिषद द्वारा पूर्व में भी विभिन्न विधिक विषयों पर व्याख्यानमालाओं का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें उच्च न्यायालयों के न्यायमूर्ति, वरिष्ठ अधिवक्ता और विधि विशेषज्ञ सहभागिता कर चुके हैं।

इस ऑनलाइन व्याख्यान में जनपद गौतमबुद्ध नगर के 100 से अधिक अधिवक्ताओं ने सक्रिय सहभागिता की।

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