12 साल, 100 करोड़ खर्च… फिर भी दादरी प्यासा! , जय हो संगठन का प्रदर्शन
पेयजल परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोप, उच्च स्तरीय जांच की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन
ग्रेटर नोएडा। दादरी नगर की बहुचर्चित पेयजल परियोजना एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2014 में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना से 12 साल बाद भी नगरवासियों को एक बूंद पानी नसीब नहीं हुआ है। परियोजना की धीमी प्रगति और कथित अनियमितताओं को लेकर मंगलवार को जय हो एक सामाजिक संस्था के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट सूरजपुर पर प्रदर्शन कर उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई।
संस्था के संस्थापक संयोजक एडवोकेट कपिल शर्मा के नेतृत्व में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी के नाम मुख्य प्रशासनिक अधिकारी अनुराग चंद्र सारस्वत को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद परियोजना अधूरी पड़ी है और नगर में बनी छह पानी की टंकियां आज भी जनता को पानी उपलब्ध नहीं करा सकी हैं।
कपिल शर्मा ने कहा कि दादरी के एक लाख से अधिक लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई यह परियोजना अब भ्रष्टाचार, लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता का उदाहरण बन गई है। उन्होंने मांग की कि वर्ष 2014 से अब तक हुए समस्त खर्च, लागत वृद्धि और कार्य प्रगति की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जाए।
संस्था के अध्यक्ष संदीप भाटी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहे हैं, ऐसे में वर्षों से अधूरी पड़ी यह परियोजना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि योजना धरातल पर नहीं उतर पाई है तो इसकी जवाबदेही तय होना जरूरी है।
पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट दिनेश भाटी ने कहा कि दादरी की जनता लंबे समय से पेयजल संकट झेल रही है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद परियोजना का लाभ लोगों तक नहीं पहुंचना चिंताजनक है। उन्होंने प्रशासन से परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन के बाद मुख्य प्रशासनिक अधिकारी अनुराग चंद्र सारस्वत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल निगम और नगर पालिका परिषद के अधिकारियों से दूरभाष पर जानकारी ली तथा आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
संस्था ने ज्ञापन में परियोजना की उच्च स्तरीय जांच, विशेष ऑडिट, लागत वृद्धि की समीक्षा, जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
प्रदर्शन में संस्था के संरक्षक प्रमोद शर्मा, महासचिव परमानंद कौशिक, संजय शर्मा, सुमंत दीक्षित, गुलशन शर्मा, सुरजीत विकल, पुष्प शर्मा, हरीश बैसोया और सचिन शर्मा सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
