विश्व क्लबफुट दिवस पर जीआईएमएस में विशेष क्लबफुट क्लिनिक का शुभारंभ, बच्चों को मिलेगा निःशुल्क उपचार और ब्रेस, हर शुक्रवार चलेगी विशेष ओपीडी

ग्रेटर नोएडा, 5 जून 2026। विश्व क्लबफुट दिवस के अवसर पर गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS), ग्रेटर नोएडा के अस्थि रोग (ऑर्थोपेडिक्स) विभाग द्वारा एक समर्पित क्लबफुट क्लिनिक का शुभारंभ किया गया। इस पहल के माध्यम से संस्थान ने बच्चों में जन्मजात क्लबफुट (टेढ़े पैर) की समस्या के विशेष और व्यवस्थित उपचार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है।

क्लिनिक का उद्घाटन जीआईएमएस के निदेशक डॉ. (ब्रिगेडियर) राकेश गुप्ता ने किया। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, ऑर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. विकास सक्सेना, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रतीक रस्तोगी सहित विभाग के चिकित्सक, रेजिडेंट डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।

नवनिर्मित क्लबफुट क्लिनिक में क्लबफुट से पीड़ित बच्चों के लिए जांच, प्लास्टर (कास्टिंग), ब्रेसिंग और नियमित फॉलो-अप जैसी समग्र चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस पहल की विशेषता यह है कि अंतरराष्ट्रीय संस्था क्योर इंटरनेशनल (Cure International) के सहयोग से जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क ब्रेस उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उपचार में निरंतरता बनी रहे और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिल सके।

यह विशेष क्लिनिक प्रत्येक शुक्रवार सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक संचालित होगा, जहां बच्चों को विशेषज्ञ परामर्श और उपचार सेवाएं प्रदान की जाएंगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि क्लबफुट की समय पर पहचान और शुरुआती उपचार से बच्चों को भविष्य में होने वाली गंभीर शारीरिक अक्षमता से बचाया जा सकता है। उन्होंने जागरूकता बढ़ाने और अधिक से अधिक बच्चों तक उपचार पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

ऑर्थोपेडिक्स विभाग ने बताया कि क्लबफुट के उपचार में विश्वभर में सफल मानी जाने वाली ‘पोंसेटी पद्धति’ (Ponseti Method) का उपयोग किया जाएगा, जिससे बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।

जीआईएमएस प्रशासन ने कहा कि यह पहल सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। संस्थान का उद्देश्य क्लबफुट के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना, समय पर उपचार सुनिश्चित करना तथा प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों को बेहतर सहायता प्रदान करना है।

कार्यक्रम का समापन रोगियों तक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, फॉलो-अप व्यवस्था को और मजबूत करने तथा सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के संकल्प के साथ हुआ।

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