बोधगया में जगद्गुरु साई माँ की ऐतिहासिक आध्यात्मिक यात्रा, 40 देशों से पहुंचे संत-साधक
बुद्ध पूर्णिमा पर महाबोधि मंदिर में छह दिवसीय साधना, ध्यान और शांति सम्मेलन का हुआ आयोजन
बोधगया, 06 मई 2026। बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर विश्व प्रसिद्ध जीवित संत, आध्यात्मिक उपचारक एवं 2,700 वर्ष पुरानी विष्णुस्वामी परंपरा की पहली महिला जगद्गुरु साई माँ के नेतृत्व में बोधगया में छह दिवसीय भव्य आध्यात्मिक यात्रा और विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक आध्यात्मिक आयोजन में दुनिया के 40 से अधिक देशों से संत, साधक, महामंडलेश्वर, आध्यात्मिक गुरु एवं श्रद्धालु शामिल हुए।
भगवान बुद्ध की ज्ञानभूमि बोधगया में आयोजित इस यात्रा के दौरान महाबोधि मंदिर स्थित पवित्र बोधि वृक्ष के नीचे प्रतिदिन सुबह और शाम मौन साधना एवं गहन ध्यान का आयोजन किया गया। बुद्ध पूर्णिमा की रात्रि में विशेष ध्यान साधना ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से अभिभूत कर दिया।
इस अवसर पर साई माँ ने कहा कि “बोधगया केवल एक स्थान नहीं, बल्कि आत्मज्ञान, सत्य और चेतना की अनुभूति का केंद्र है।” उन्होंने अपने संदेश में कहा कि साधना का उद्देश्य कुछ बनना नहीं, बल्कि भ्रम से परे अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानना है।
बोधगया स्थित वाट थाई मगध बौद्ध विपश्यना मठ में आयोजित अंतरराष्ट्रीय आंतरिक शांति सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों के संत, भिक्षु, आध्यात्मिक गुरु एवं धर्म प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान वाट थाई मगध के प्रमुख लामा ने मानवता और सनातन धर्म के लिए साई माँ के आजीवन योगदान को सम्मानित करते हुए उन्हें “अंतरराष्ट्रीय आंतरिक शांति सम्मेलन सम्मान” प्रदान किया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए साई माँ ने कहा, “शांति कोई मंजिल नहीं है, बल्कि हमारा वास्तविक स्वरूप है। हम सभी बुद्ध हैं, हम सभी दिव्य चेतना हैं।” उनके इस संदेश ने उपस्थित श्रद्धालुओं और आध्यात्मिक साधकों को गहराई से प्रभावित किया।
इस आध्यात्मिक यात्रा के दौरान श्री जगन्नाथ मंदिर में काशी के 21 विद्वान पंडितों द्वारा विशेष वैदिक अग्नि यज्ञ भी आयोजित किया गया। भगवान विष्णु, भगवान जगन्नाथ, महालक्ष्मी एवं सप्तऋषियों को समर्पित इस यज्ञ में विष्णु सूक्त, श्री सूक्त एवं सप्तऋषि गायत्री मंत्र का सामूहिक जाप किया गया। कार्यक्रम का संकल्प आत्मज्ञान, समृद्धि एवं विश्व कल्याण के लिए लिया गया।
यज्ञ के उपरांत साई माँ ने 500 से अधिक श्रद्धालुओं को दर्शन एवं आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान भंडारे एवं सामूहिक प्रसाद वितरण का भी आयोजन किया गया।
इस पवित्र यात्रा का समापन विष्णुपद मंदिर में पितृ पूजा एवं पिंडदान तथा महाबोधि मंदिर में अंतिम प्रार्थना एवं ध्यान के साथ हुआ। आयोजन के समापन पर यह संदेश दिया गया कि आंतरिक शांति किसी दूरस्थ लक्ष्य का नाम नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के भीतर विद्यमान एक जीवंत सत्य है।
