रंगपुरी में आयोजित वार्षिक संत समागम में ध्यानाचार्य डॉ. अजय जैन ने लिया भाग, धार्मिक एकता और सद्भाव का बना मंच
- विहिप अध्यक्ष, सर्व धर्म संसद के संयोजक, इस्लामिक विद्वान और अनेक संतों की रही गरिमामयी उपस्थिति
बुलंदशहर, 17 जून 2025।
बुलंदशहर जिले के ग्राम रंगपुरी में गत शनिवार 14 जून को आयोजित वार्षिक संत समागम अध्यात्म, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का अद्भुत संगम बनकर उभरा। संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जनकल्याण चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष स्वामी वीरसिंह हितकारी के विशेष आह्वान पर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में देश के प्रमुख संतों, धार्मिक नेताओं और सामाजिक प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
समागम में ध्यानाचार्य डॉ. अजय जैन की गरिमामयी उपस्थिति विशेष आकर्षण रही। स्वामी वीरसिंह जी ने मंच पर उनका आत्मीय आलिंगन कर स्वागत किया, जो उपस्थित श्रद्धालुओं और संतजनों के लिए एकता व सद्भाव का जीवंत उदाहरण बना।
इस अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आलोक कुमार, भारतीय सर्व धर्म संसद के संयोजक गोस्वामी सुशील जी महाराज, प्रख्यात इस्लामिक विद्वान मौलाना ए.आर. साहीन कासमी, और संत प्रेमनाथ योगी जी सहित अनेक आध्यात्मिक गुरु मौजूद रहे। इनके अतिरिक्त, क्षेत्रीय प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी उपस्थिति दर्ज कर समागम की शोभा बढ़ाई।
कार्यक्रम की शुरुआत भक्तिमय आरती से हुई, जिससे सम्पूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। इसके बाद वक्ताओं ने मंच से अपने विचार रखे, जिनमें समाज में शांति, धार्मिक सहिष्णुता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने की अपील की गई।
ध्यानाचार्य डॉ. अजय जैन और विहिप अध्यक्ष श्री आलोक कुमार के बीच विशेष संवाद भी इस अवसर का केंद्र रहा, जिसमें समरसता और राष्ट्र निर्माण के मुद्दों पर विचार साझा किए गए।
समागम के समापन पर स्वामी वीरसिंह हितकारी जी ने सभी संतों, विद्वानों और श्रद्धालुओं का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच आपसी समझ, सहयोग और राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। भविष्य में भी ऐसे आयोजन निरंतर होते रहें, इसके लिए उन्होंने सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।
यह संत समागम न केवल आध्यात्मिक प्रेरणा का स्रोत बना, बल्कि अंतरधार्मिक संवाद और सांप्रदायिक सौहार्द को भी नया आयाम देने में सफल रहा।
