गंगा एक्सप्रेसवे पर स्विस तकनीक से होगी रियल-टाइम जांच, अब सड़क बनेगी और भी बेहतर!
लखनऊ, 3 मई: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार गंगा एक्सप्रेसवे को हाईटेक और विश्वस्तरीय बनाने के लिए अब स्विट्जरलैंड की आधुनिक तकनीक का सहारा ले रही है। इसके लिए ज्यूरिख की ईटीएच यूनिवर्सिटी और आरटीडीटी लैब्स से समझौता किया गया है। इस तकनीक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और खास सेंसर लगाए गए हैं, जो सड़क की गुणवत्ता और आराम का निर्माण के समय ही पूरा-पूरा आंकलन करते हैं।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
एक खास इनोवा गाड़ी को वाइब्रेशन टेक्नोलॉजी और 7 सेंसर (4 क्वॉलिटी और 3 कम्फर्ट के लिए) से लैस किया गया है। यह गाड़ी गंगा एक्सप्रेसवे की हर लेन पर चलकर सड़क की सतह, ऊंचाई-नीचाई और सफर के आराम का डाटा जुटाती है। ये जानकारी ऑनलाइन ग्राफ के रूप में तुरंत देखी जा सकती है, जिससे जहां कमी होती है, वहीं सुधार किया जा सके।
क्या फायदा होगा?
पहले सड़क बन जाने के बाद खामियों की जांच होती थी, जिससे सुधार में समय और पैसा ज्यादा लगता था। अब निर्माण के दौरान ही सड़क की हर कमी पकड़कर उसे ठीक किया जा रहा है। इससे सड़क मजबूत भी बनेगी और सफर भी आरामदायक रहेगा।
अब गोरखपुर एक्सप्रेसवे पर भी होगा इस्तेमाल
गंगा एक्सप्रेसवे पर इस तकनीक की सफलता को देखकर सरकार अब इसे गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर भी लागू करने जा रही है। यह एक्सप्रेसवे गोरखपुर को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा।
योगी सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को ‘एक्सप्रेस प्रदेश’ के रूप में विकसित करना है, और यह तकनीक उस दिशा में बड़ा कदम है।
