फर्जी फाइनेंसर बनकर युवक से 5.25 लाख की साइबर ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार
- मैजिक पेन से किए हस्ताक्षर की कूटरचना, आधार-मॉर्फिंग कर बनाई फर्जी सिम – नोएडा साइबर थाना पुलिस की कार्रवाई
नोएडा, 10 अप्रैल।
साइबर क्राइम थाना, कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर की पुलिस ने दो ऐसे शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने खुद को वाहन फाइनेंसर बताकर एक युवक से एसयूवी कार फाइनेंस कराने के नाम पर ₹5.25 लाख की साइबर ठगी को अंजाम दिया। आरोपियों ने पीड़ित को वाहन जल्द डिलीवर कराने का झांसा देकर न सिर्फ चेक हासिल किए, बल्कि तकनीकी उपकरणों और कूटरचित दस्तावेजों की मदद से चेक में छेड़छाड़ कर बैंक से मोटी रकम भी निकाल ली। आरोपियों ने इस अपराध में मैजिक पेन, आधार कार्ड मॉर्फिंग, फर्जी सिम, और नकली मोहर जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किया।
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ऐसे रची गई ठगी की साजिश
पीड़ित व्यक्ति ने 24 मार्च 2025 को साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया कि वह महिंद्रा XUV-700 खरीदना चाहता था और इसके लिए विभिन्न डीलरशिप से कोटेशन ले रहा था। इसी दौरान राजीव धींगरा नामक व्यक्ति ने उससे संपर्क किया और खुद को “आशीष” नामक वाहन फाइनेंसर बताया। उसने कार जल्द दिलाने और कागजी कार्यवाही पूरी कराने का भरोसा दिया।
कुछ दिन बाद राजीव, प्रेम प्रकाश सिंह को “अंकित” नाम से पीड़ित से मिलवाया और फाइनेंस प्रक्रिया के नाम पर दस्तावेज जमा करने के लिए कहा। इसी दौरान आरोपियों ने पीड़ित से तीन चेक लिए — एक कैंसिल चेक और दो चेक जिनमें ₹34,265-₹34,265 की राशि अंकित थी।
आरोपियों ने चालाकी से पीड़ित से मैजिक पेन से हस्ताक्षर करवाए, जिससे बाद में उसके हस्ताक्षर और चेक के विवरणों में फेरबदल किया जा सके। उन्होंने चेक पर “Account Payee” शब्द मिटाकर “Self” लिखा, फिर फर्जी मोहर और नकली हस्ताक्षर लगाकर बल्लभगढ़ (हरियाणा) स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा से ₹5,25,000 की नकद निकासी कर ली।
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फर्जी दस्तावेज और तकनीकी चालाकी से अंजाम दी गई ठगी
जांच में पता चला कि आरोपियों ने इंटरनेट से किसी अन्य व्यक्ति का आधार कार्ड डाउनलोड किया और फोटो मॉर्फिंग तकनीक से उसमें अपनी तस्वीर जोड़ दी। इस फर्जी आधार कार्ड की मदद से एक मोबाइल सिम कार्ड एक्टिवेट कराया, जिसे सेकेंड हैंड मोबाइल फोन में डालकर ठगी की प्रक्रिया के दौरान इस्तेमाल किया गया।
यही नहीं, ताकि पीड़ित को बैंक से SMS या OTP न मिले, आरोपियों ने एयरटेल कस्टमर केयर को कॉल कर पीड़ित का मोबाइल नंबर बंद करवा दिया। इस दौरान सभी बातचीत फर्जी सिम से की गई ताकि असली पहचान न उजागर हो।
ठगी के बाद आरोपियों ने इस्तेमाल में लाए गए मोबाइल फोन, सिम कार्ड, दस्तावेज, मोहर, मैजिक पेन आदि को हिंडन नदी में फेंक दिया, जिससे साक्ष्य न मिल सकें।
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पुलिस ने ऐसे पकड़े आरोपियों को
घटना की गंभीरता को देखते हुए नोएडा साइबर क्राइम थाना पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की।
पुलिस टीम ने पीड़ित के बयान, उसके घर और सोसाइटी के सीसीटीवी फुटेज, बैंक ट्रांजैक्शन डिटेल, मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए।
तकनीकी सर्विलांस के आधार पर 9 अप्रैल को पुलिस ने मुख्य आरोपी राजीव धींगरा को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर उसके साथी प्रेम प्रकाश सिंह को भी उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
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गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण
1. राजीव धींगरा, पुत्र मुरलीधर धींगरा, उम्र – 47 वर्ष, स्थायी पता – हर्ष विहार, दिल्ली
2. प्रेम प्रकाश सिंह, पुत्र स्वर्गीय अरुण प्रकाश सिंह, उम्र – 41 वर्ष, स्थायी पता – गाजीपुर, उत्तर प्रदेश
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आरोपियों पर दर्ज धाराएं
आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा
316(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2), 238
तथा
आईटी एक्ट की धारा 66
के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है।
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साइबर पुलिस की सतर्कता से मिली सफलता
नोएडा साइबर क्राइम थाना प्रभारी और उनकी टीम की सतर्कता व तकनीकी जांच की बदौलत एक जटिल और योजनाबद्ध साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश हुआ है। यह मामला दर्शाता है कि कैसे अपराधी आम लोगों की भावनाओं और जरूरतों का फायदा उठाकर ठगी को अंजाम दे रहे हैं।
पुलिस की अपील – ऐसे बचें साइबर ठगी से:
किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने बैंक डिटेल, आधार कार्ड या अन्य संवेदनशील दस्तावेज न दें।
किसी भी दस्तावेज पर मैजिक पेन या किसी अन्य अंजान पेन से हस्ताक्षर न करें।
हर लेनदेन में सावधानी बरतें और हमेशा विश्वसनीय स्रोतों से ही फाइनेंस या लोन लें।
लोन या वाहन डीलिंग में व्यक्तिगत रूप से संबंधित संस्था के अधिकृत कार्यालय जाकर ही कार्यवाही करें।
साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
यह मामला साइबर जागरूकता और सतर्कता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। पुलिस की मुस्तैदी से जहां पीड़ित को न्याय की उम्मीद मिली है, वहीं आम जनता के लिए भी यह एक सीख है कि डिजिटल और दस्तावेजी लेनदेन में अत्यधिक सावधानी बरतना आज के समय की आवश्यकता है।
