रेरा का बड़ा कदम: सभी हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के कलेक्शन अकाउंट नंबर अब सार्वजनिक, पारदर्शिता को मिलेगा बढ़ावा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश रेरा (भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण) ने रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए एक अहम पहल की है। अब राज्य में पंजीकृत सभी लाइव रेरा प्रोजेक्ट्स के कलेक्शन एकाउंट नंबर रेरा पोर्टल पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होंगे। इससे खरीदारों को यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि उनकी जमा की गई राशि का उपयोग उन्हीं परियोजनाओं के निर्माण में हो रहा है।
रेरा की स्पष्ट हिदायत: पैसा सिर्फ कलेक्शन एकाउंट में ही जमा करें
रेरा अध्यक्ष संजय आर. भूसरेड्डी ने प्रोमोटर्स और आवंटियों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के भुगतान से पूर्व परियोजना से संबंधित सम्पूर्ण विवरण की रेरा पोर्टल पर जांच करें और केवल निर्धारित कलेक्शन एकाउंट में ही भुगतान करें। यह सुनिश्चित करने के लिए कि खरीदारों की जमा की गई रकम का दुरुपयोग न हो और परियोजनाएं समय पर पूरी हों, यह कदम बेहद जरूरी है।
रेरा अधिनियम 2016 के तहत स्पष्ट नियम:
भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 के अनुसार, परियोजना के लिए प्राप्त धनराशि का 70 प्रतिशत भाग एक अलग ‘सेपरेट एकाउंट’ में रखना अनिवार्य है, जिसे केवल निर्माण कार्यों में ही खर्च किया जा सकता है।
रेरा के 29 नवम्बर 2023 को जारी निर्देशों के तहत:
हर प्रोजेक्ट के प्रोमोटर को तीन खातों – कलेक्शन एकाउंट, सेपरेट एकाउंट, ट्रांजेक्शन एकाउंट – की जानकारी पोर्टल पर देना अनिवार्य है।
सभी बैंक अब यह सुनिश्चित करेंगे कि कलेक्शन एकाउंट में प्राप्त धनराशि का 70% हिस्सा स्वतः सेपरेट एकाउंट में और 30% ट्रांजेक्शन एकाउंट में ट्रांसफर हो।
दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
रेरा ने कुछ मामलों में यह पाया है कि प्रोमोटर्स खरीदारों से ली गई धनराशि को निर्धारित कलेक्शन एकाउंट में जमा नहीं कर रहे, बल्कि अन्य खातों में डालकर उसे निजी या अन्य प्रयोजनों में खर्च कर रहे हैं। यह रेरा अधिनियम का उल्लंघन है और दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में रेरा ने कड़ी कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है।
खुला है ऑनलाइन लिंक
लाइव प्रोजेक्ट्स के कलेक्शन एकाउंट नंबर अब UP RERA पोर्टल के Details of Collection Account (Live Projects) लिंक पर देखे जा सकते हैं।
रेरा अध्यक्ष संजय आर. भूसरेड्डी ने कहा कि यह पहल न केवल खरीदारों की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगी, बल्कि रियल एस्टेट क्षेत्र में विश्वास और निवेश दोनों को मजबूत बनाएगी। पारदर्शिता से जहां प्रमोटर्स की साख बनेगी, वहीं खरीदारों का सपनों का घर पाने का रास्ता भी आसान होगा।
