नारद मोह प्रसंग में नारद मुनि का टूटा अहंकार, राम जन्म पर झूमे श्रद्धालु
- सेक्टर-82 के पॉकेट-7 में श्रीराम कथा के तीसरे दिन भावपूर्ण प्रसंगों का वर्णन
ग्रेटर नोएडा। सेक्टर-82 स्थित पॉकेट-7 में चल रही श्रीराम कथा के तीसरे दिन कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी पंचमानंद महाराज ने श्रद्धालुओं को नारद मोह, जय-विजय श्राप और राम जन्म जैसे भावनात्मक प्रसंगों की कथा सुनाई। कथा में बताया गया कि जब देवर्षि नारद कठिन तपस्या में लीन होते हैं, तब कामदेव उन्हें मोहित करने का प्रयास करता है, लेकिन असफल होता है। इससे नारद को अपने संयम पर गर्व हो जाता है और वह ब्रह्मा, शिव और भगवान विष्णु के समक्ष इस बात का उल्लेख करते हैं।
भगवान विष्णु नारद के भीतर उपजे इस अहंकार को अपनी माया से दूर करते हैं। नारद मोह प्रसंग में यह बताया गया कि किस प्रकार भगवान विष्णु ने उन्हें एक राजकुमारी से प्रेम करवाकर, फिर विवाह न हो पाने की परिस्थिति बनाकर नारद का अहंकार चूर-चूर कर दिया। इस प्रसंग को सुन श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
महामंडलेश्वर ने राम जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि संतानहीन राजा दशरथ ने श्रृंगी ऋषि द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ कराया, जिसमें अग्निदेव खीर लेकर प्रकट हुए। खीर तीनों रानियों में बांटी गई, और समय आने पर कौशल्या से राम, सुमित्रा से लक्ष्मण व शत्रुघ्न तथा कैकेयी से भरत का जन्म हुआ। अयोध्या में आनंद की लहर दौड़ गई और राजा दशरथ ने दोनों हाथों से दान दिया। श्रद्धालुओं ने राम जन्मोत्सव को भव्यता से मनाया और भजन-कीर्तन पर नृत्य कर उत्साह जताया।
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष राघवेंद्र दुबे ने बताया कि 9 अप्रैल को कथा में बाल लीलाएं, विश्वामित्र यज्ञ रक्षा, अहिल्या उद्धार जैसे प्रसंग सुनाए जाएंगे।
इस अवसर पर देवमणि शुक्ल, रवि राघव, गोरे लाल, संजय पांडे, हरि सिंह, रमेश चंद्र शर्मा, रमेश दास, बहादुर चौहान, हंसमणि शुक्ल, विष्णु शर्मा, रविंद्र कुमार, विश्वनाथ त्रिपाठी, नीरज शर्मा, गौरव, संजय शुक्ला, पप्पू सिंह, देवेंद्र गुप्ता, उमाकांत त्रिपाठी, रमेश वर्मा, विकास शर्मा, रमेश गुप्ता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
