विश्व स्वास्थ्य दिवस पर जीआईएमएस में सीएमई का आयोजन: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बढ़ावा देने पर हुआ मंथन
ग्रेटर नोएडा। विश्व स्वास्थ्य दिवस 2025 के उपलक्ष्य में गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (जीआईएमएस), ग्रेटर नोएडा में 5 अप्रैल को एक दिवसीय सीएमई (निरंतर चिकित्सा शिक्षा) का आयोजन किया गया। “मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बढ़ावा देना: नवाचार, चुनौतियाँ और सर्वोत्तम प्रथाएँ” विषय पर केंद्रित यह शैक्षणिक आयोजन जीआईएमएस के पतंजलि हॉल में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक सरस्वती वंदना और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। सामुदायिक चिकित्सा विभाग की प्रमुख प्रो. डॉ. रंभा पाठक ने स्वागत भाषण में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की समग्रता पर प्रकाश डालते हुए सीएमई के उद्देश्य स्पष्ट किए। निदेशक डॉ. (ब्रिगेडियर) राकेश गुप्ता ने संस्थान के दृष्टिकोण और ऐसे आयोजनों की प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्य अतिथि राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), नई दिल्ली के निदेशक डॉ. रंजन दास ने उद्घाटन भाषण में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े समसामयिक मुद्दों और समाधान प्रस्तुत किए। उन्होंने जनस्वास्थ्य प्रणाली में नवाचारों की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान कई तकनीकी सत्रों का आयोजन हुआ। डॉ. के. मदन गोपाल ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में नवाचार और प्रभावी रणनीतियों पर व्याख्यान दिया। डॉ. रुचिका भटनागर ने पहले 1000 दिनों में पोषण की भूमिका और उसके दीर्घकालिक प्रभावों पर तथ्यात्मक जानकारी साझा की। डॉ. रेणु श्रीवास्तव ने उत्तर प्रदेश में नवजात शिशु देखभाल की वर्तमान स्थिति और सुधारात्मक प्रयासों पर आधारित प्रस्तुति दी। वहीं, डॉ. नेहा मिश्रा ने मातृ मृत्यु दर को कम करने हेतु रोकथाम-आधारित रणनीतियों पर अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
सभी सत्रों का संचालन विषय विशेषज्ञों – डॉ. दिवाकर झा, डॉ. रंजना सिंह, डॉ. निधि बुध, डॉ. हरिओम सोलंकी, डॉ. चिंटू चौधरी, डॉ. आशीष मारवाह और डॉ. अर्चना गुप्ता – ने किया। उन्होंने न केवल चर्चा को दिशा दी, बल्कि श्रोताओं से सक्रिय संवाद भी सुनिश्चित किया।
अंत में, डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी वक्ताओं, अतिथियों, आयोजकों और प्रतिभागियों के योगदान के लिए आभार प्रकट किया। कार्यक्रम को प्रतिभागियों द्वारा अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरक बताया गया। जीआईएमएस द्वारा आयोजित यह सीएमई मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास सिद्ध हुई।
