जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च में एचआर कॉन्क्लेव 4.0: डिजिटल युग में कार्यस्थल का नया स्वरूप
ग्रेटर नोएडा, 31 जनवरी 2025 – जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च (GLBIMR) ने एचआर कॉन्क्लेव 4.0 का भव्य आयोजन किया, जिसका विषय “डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और एआई के माध्यम से कार्यस्थल का भविष्य आकार देना” था। इस महत्वपूर्ण आयोजन में उद्योग जगत के दिग्गजों, एचआर विशेषज्ञों और नवोदित पेशेवरों ने भाग लिया और आधुनिक कार्यस्थल की बदलती चुनौतियों और अवसरों पर गहन मंथन किया।
एचआर जगत के दिग्गजों की भागीदारी
कॉन्क्लेव के दौरान विभिन्न उद्योगों के प्रतिष्ठित एचआर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और विचार साझा किए, जिनमें शामिल थे:
श्री अभिषेक कुमार – हेड एचआर, एरिक्सन ग्लोबल इंडिया प्रा. लि. (GSC & GCC)
श्री नितिन खिंद्रिया – सीएचआरओ, ओमेगा सेकी मोबिलिटी
सुश्री कशिश कपूर – हेड एचआर, एनईसी कॉर्पोरेशन इंडिया
श्री वीर भारती – हेड एचआर बिजनेस पार्टनर, यामाहा मोटर सॉल्यूशंस इंडिया
श्री कुमार आलोक शुभम – जनरल मैनेजर एचआर, मैक्स एस्टेट्स लि.
सुश्री विभूति गुप्ता – टीए एशिया, लेनोवो
कॉन्क्लेव की मुख्य झलकियां
इस दौरान पैनलिस्ट्स ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के बढ़ते प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की। चर्चा के प्रमुख बिंदु रहे:
✅ डिजिटल युग में कार्यस्थल – एआई और ऑटोमेशन से बदलते कार्य-संस्कृति के पहलू।
✅ अपस्किलिंग और रिस्किलिंग – आधुनिक तकनीक के दौर में सतत शिक्षा की अनिवार्यता।
✅ मानव संसाधन बनाम स्वचालन – प्रौद्योगिकी के साथ तालमेल बिठाने की रणनीतियां।
✅ भू-राजनीति का प्रभाव – वैश्विक ट्रेंड्स जो एचआर नीतियों को प्रभावित कर रहे हैं।
✅ कौशल आधारित भर्ती – अनुभव के बजाय दक्षता को प्राथमिकता देने की नई नीति।
✅ एआई के कारण नौकरी की हानि को कम करना – तकनीकी नवाचारों के साथ नए रोजगार अवसर खोजना।
निष्कर्ष और भविष्य की दिशा
एचआर कॉन्क्लेव 4.0 ने शिक्षाविदों और उद्योग जगत के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य किया और जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च की उच्च शिक्षा को उद्योग की जरूरतों से जोड़ने की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया। इस आयोजन ने छात्रों और युवा पेशेवरों को एआई-संचालित कार्यस्थल में सफलता के व्यावहारिक मंत्रों से सशक्त किया।
डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के इस युग में, एचआर कॉन्क्लेव 4.0 ने कार्यस्थल के भविष्य को नई दृष्टि दी और आधुनिक एचआर रणनीतियों की राह प्रशस्त की।
