महाकुंभ 2025: 144 साल बाद बन रहा त्रिवेणी योग, मौनी अमावस्या पर अमृत स्नान से मिलेगा विशेष पुण्य
प्रयागराज, 28 जनवरी महाकुंभ 2025 के प्रमुख पर्व मौनी अमावस्या का अमृत स्नान 29 जनवरी, बुधवार को होगा। इस वर्ष विशेष रूप से 144 वर्षों बाद अद्भुत त्रिवेणी योग बन रहा है, जो समुद्र मंथन के योग के समान माना जा रहा है। ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार, इस योग में त्रिवेणी संगम में स्नान करने से सहस्त्र वाजपेय यज्ञ और सौ अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है। यह योग मंगलवार अपराह्न 2.35 से 8 फरवरी प्रातः 7.25 बजे तक रहेगा।
विशिष्ट संयोग और पुण्य के अवसर
पंचांग के अनुसार, माघ मास की अमावस्या तिथि 28 जनवरी को सांयकाल 7:32 बजे से शुरू होकर 29 जनवरी को शाम 6:05 बजे तक रहेगी। इस दौरान मकर राशि में सूर्य, चंद्रमा और बुध का एक साथ होना, और बृहस्पति का नवम दृष्टि में होना, त्रिवेणी योग बना रहा है। ज्योतिषाचार्य एचके शुक्ला के अनुसार, इस योग में स्नान और पूजा से विशेष फल प्राप्त होगा।
संगम स्नान का महत्व
मौनी अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और भगवान विष्णु की पूजा विशेष लाभकारी मानी जाती है। जो श्रद्धालु संगम में स्नान नहीं कर पा रहे हैं, वे गंगा जल से घर पर ही स्नान करके पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व है, और पूरे दिन अमावस्या तिथि का स्नान शुभ माना गया है।
स्नान और दान के शुभ मुहूर्त
मौनी अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त से लेकर अमृत चौघड़िया और शुभ चौघड़िया मुहूर्त तक स्नान करना विशेष फलदायी है। साथ ही, पितरों की शांति के लिए पूजा और दान से पुण्य की प्राप्ति होती है।
