चैत्र शुक्ल प्रतिपदा: आर्य संस्कृति और नववर्ष का संदेश: पं. सागर शास्त्री
ग्रेटर नोएडा। सत्य सनातन धर्म और संस्कारों को संजोते हुए, ग्रेटर नोएडा के विद्वान पं. सागर शास्त्री ने भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को लेकर एक विशेष संदेश दिया है। उन्होंने प्रकृति के सौंदर्य और भारतीय संस्कृति के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि जब धरती माता शस्य-श्यामला बनती है और स्नेह की सुधा बरसाती है, तभी घर-घर खुशहाली आती है।
पं. सागर शास्त्री ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह नववर्ष केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आर्यावर्त की पवित्र भूमि पर हमारी सांस्कृतिक धरोहर और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने नववर्ष को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर मनाने का आह्वान किया, जो युक्ति और प्रमाण से सिद्ध है और आर्य संस्कृति की कीर्ति का प्रतीक है।
उन्होंने कहा, “यह हमारी अनमोल विरासत है, जिसे किसी उधार की आवश्यकता नहीं। हमें अपनी संस्कृति और संस्कारों पर गर्व है, और यही नववर्ष हमें स्वीकार है।”
इस संदेश के माध्यम से पं. सागर शास्त्री ने भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अपनी परंपराओं के संरक्षण का आह्वान किया।
