आर्षायण ट्रस्ट (पंजीकृत) 22 दिसंबर को मनाएगा मकर संक्रांति महोत्सव: आचार्य दार्शनेय का संदेश – “वैदिक परंपराएं ही सच्ची पहचान”
ग्रेटर नोएडा। आर्षायण ट्रस्ट (पंजीकृत) के अध्यक्ष और वैदिक तिथिपत्रम् के संपादक आचार्य दार्शनेय लोकेश ने कहा कि मकर संक्रांति और उत्तरायण केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और वैदिक ज्ञान का प्रतीक है। यह पर्व पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में दिनमान बढ़ने की शुरुआत का संकेत देता है।
उन्होंने कहा, “वर्तमान पंचांगों में त्रुटियों के कारण लोग मकर संक्रांति को 14 जनवरी को मनाते हैं, जबकि वैदिक ज्योतिष और खगोल शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति इस वर्ष 22 दिसंबर को मनाई जाएगी। इस दिन मकर रेखा पर किसी भी वस्तु की छाया नहीं बनती, जो इसका वैज्ञानिक प्रमाण है।”
उत्तरायण महोत्सव का विशेष कार्यक्रम
आर्षायण ट्रस्ट द्वारा 22 दिसंबर, 2024 को ग्रेटर नोएडा के सी-276, गामा-1 स्थित कार्यालय में वैदिक रीति से उत्तरायण पर्व का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर 11 यज्ञ कुंडों में 44 दंपतियों द्वारा विशेष यज्ञ संपन्न होगा। यजमानों के सुख-समृद्धि, आयु, और आरोग्य के लिए महामृत्युंजय और मेधा वर्धन मंत्र की विशेष आहुतियां दी जाएंगी।
कार्यक्रम का विवरण
आचार्य दार्शनेय लोकेश ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9 बजे अतिथियों के स्वागत के साथ होगी। इसके बाद विदुषी कन्याओं द्वारा वेद पाठ और भजन प्रस्तुत किए जाएंगे। प्रमुख आकर्षण निम्नानुसार हैं:
यज्ञ संचालन: डॉ. कल्पना आर्या (असिस्टेंट प्रोफेसर, दौलतराम महाविद्यालय, दिल्ली)।
प्रवचन: स्वामी ऋतस्पति जी महाराज (नर्मदापुरम्, मध्य प्रदेश) और स्वयं आचार्य दर्शनीय लोकेश।
खिचड़ी भोग और प्रसाद वितरण: कार्यक्रम का समापन दोपहर 1:15 बजे होगा।
संस्कृति और धर्म के लिए समर्पण
आचार्य दर्शनीय लोकेश ने सभी श्रद्धालुओं से इस वैदिक आयोजन में भाग लेने और इसे सफल बनाने की अपील की। उन्होंने कहा, “यह पर्व हमें वैदिक ज्ञान और परंपरा के महत्व को समझाने का अवसर प्रदान करता है। श्रद्धालु अपनी स्वेच्छा से आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।”
संपर्क:
कार्यक्रम से संबंधित जानकारी के लिए आर्षायण ट्रस्ट के पदाधिकारियों से संपर्क किया जा सकता है।
