गोरखपुर में प्रदेश का पहला आयुष विश्वविद्यालय, 30 नवम्बर तक पूरा होगा निर्माण कार्य

गोरखपुर, 13 नवम्बर 2024: गोरखपुर, जो अब “सिटी ऑफ नॉलेज” के रूप में पहचाना जाता है, में प्रदेश का पहला आयुष विश्वविद्यालय बनने के अंतिम चरण में है। महायोगी गुरु गोरखनाथ के नाम पर बन रहे इस विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य इस माह के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। इसमें आयुष से जुड़ी सभी चिकित्सा पद्धतियों—आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, प्राकृतिक चिकित्सा, योग और सिद्धा—से संबंधित पारंपरिक पाठ्यक्रमों के साथ-साथ आधुनिक ज़रूरतों के मुताबिक विशिष्ट कोर्स भी चलाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में आयुष विभाग के अधिकारी अन्य राज्यों में चल रहे आयुष पाठ्यक्रमों का तुलनात्मक अध्ययन कर रहे हैं ताकि यहां भी उच्च मानक के कोर्स डिजाइन किए जा सकें। वर्तमान में पीएचडी समेत दर्जनभर पाठ्यक्रमों को शुरू करने की योजना बनाई गई है।

यह विश्वविद्यालय गोरखपुर के भटहट क्षेत्र के पिपरी में 52 एकड़ क्षेत्र में बनाया जा रहा है, और इसका शिलान्यास 28 अगस्त 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा किया गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में देखे जा रहे इस विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य की प्रगति काफी तेज़ है, और इसे 30 नवम्बर 2024 तक पूर्ण कर लिया जाएगा।

प्रदेश में पहले आयुष विश्वविद्यालय के अस्तित्व में आने से आयुष के सभी कॉलेजों का नियमन अब एक ही जगह से होगा। वर्तमान सत्र 2024-25 में 97 आयुष कॉलेजों/संस्थाओं के 7,000 विद्यार्थी इस विश्वविद्यालय से जुड़े हुए हैं।

नए रोजगारपरक पाठ्यक्रम और सुविधाएं
महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एके सिंह के मुताबिक, मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप विश्वविद्यालय में रोजगारपरक कई नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इनमें पीएचडी, बीएससी नर्सिंग आयुर्वेद, बी फार्मा आयुर्वेद, बी फार्मा होम्योपैथी, पंचकर्म थेरेपिस्ट डिप्लोमा, योग-नेचुरोपैथी डिप्लोमा, और विदेशी छात्रों के लिए विशेष कोर्स शामिल होंगे।

इसके अलावा, आयुष विश्वविद्यालय में आयुष ओपीडी की शुरुआत 15 फरवरी 2023 को की गई थी, जो अब तक एक लाख से अधिक मरीजों को परामर्श दे चुकी है। आयुष अस्पताल की भी जल्द शुरुआत होने से यहां परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों से उपचार की बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी।

हेल्थ टूरिज्म और औषधीय खेती को मिलेगा बढ़ावा
आयुष चिकित्सा पद्धतियों के प्रचार-प्रसार से न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार होगा, बल्कि इससे प्रदेश में हेल्थ टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। किसान अब औषधीय खेती से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। आयुष विश्वविद्यालय एक व्यापक रोजगार सृजन और सकारात्मक बदलाव का कारक बनेगा।

आयुष विश्वविद्यालय के सफल क्रियान्वयन से प्रदेश के विकास में नया आयाम जुड़ने की उम्मीद है, जो ना सिर्फ शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास की नई राह भी खोलेगा।

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