दीपावली पूजन के अवशेषों का करें सही विसर्जन, पर्यावरण को रखें सुरक्षित: पर्यावरणविद् ओम रायज़ादा की अपील
ग्रेटर नोएडा। दीपावली का पावन पर्व अब समाप्ति की ओर है, और इस समय कई लोग पूजा में उपयोग की गई पुरानी मूर्तियों, फूल-मालाओं जैसे अवशेषों का विसर्जन करने की तैयारी कर रहे हैं। पर्यावरण प्रेमी ओम रायज़ादा ने लोगों से अपील की है कि वे इन पूजन सामग्रियों का विसर्जन तालाबों, नदियों, नालों, पीपल के पेड़ या केले के पेड़ पर न करें। उन्होंने कहा कि इन अवशेषों को खुले स्थान पर या निर्जन जगह में जमीन में दबाकर विसर्जित करना ही सही तरीका है। यह प्रकृति के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धा और जिम्मेदारी होगी।
रायज़ादा ने बताया कि नदी, तालाब, और पेड़ों पर इन अवशेषों का विसर्जन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। तालाबों और नदियों में मूर्तियां और फूल फेंकने से पानी में प्रदूषण फैलता है, जिससे जलजीवों और पौधों को भी हानि होती है। वहीं, पीपल या केले के पेड़ पर माला या अन्य पूजन सामग्री डालने से पेड़ की जड़ें खराब हो सकती हैं, जिससे पेड़ सूख भी सकता है।
रायज़ादा का कहना है कि यदि हम वास्तव में प्रकृति प्रेमी हैं, तो हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि हमारे धार्मिक कार्यों से पर्यावरण को कोई नुकसान न हो। किसी भी प्रकार की जानकारी या सहायता के लिए ओम रायज़ादा से 9718100213 पर संपर्क किया जा सकता है।
उन्होंने सभी से अनुरोध किया है कि इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं, ताकि लोग जागरूक हों और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में अपना योगदान दें।
