योग और स्वास्थ्य: पेट के लिए महत्वपूर्ण एक्सरसाइज , बता रहे हैं योग गुरु ऋषि वशिष्ठ
☀ योग और स्वास्थ्य ☀
पेट के लिए मात्र 10 एक्सरसाइज जो पेट की शक्ति को बढ़ा कर पेट को सम अवस्था में रखते हुए पेट सम्बंधित सभी समस्याओं को दूर करे –
आगे क्रमशः उदर-शक्ति-विकासक क्रिया नं. 10 की तीन क्रियाऐं , इस प्रकार से करें।
उदर-शक्ति-विकासक क्रिया नं. 10
(नौलि)
स्थिति –
दोनों पैरों में एक हाथ का अंतर रखकर खड़े हों, दोनों हाथों को नीचे झुककर घुटने पर स्थापित करें।
1- मध्यनौलि
क्रिया विधि:
1- मध्यनौलि: – नाक से श्वास को बाहर निकालकर पेट को खाली करें। आंतरिक शक्ति से खाली पेट को आगे-पीछे हिलाएँ। श्वास लेने की इच्छा होने पर पेट का हिलाना बंद करें, इस विधि को मध्य नौलि कहते हैं।
2- वाम नौलि:
क्रिया विधि:
पुनः श्वास को बाहर निकालें, पेट को खाली करें, आंतरिक शक्ति से खाली पेट को, दाहिने घुटने को किंचित दबाते हुए, बाएँ से दाएँ यथाशक्ति घुमाएँ। श्वास लेने की इच्छा होने पर क्रिया को बंद करें। इसे वाम नौलि कहते हैं।
3- दक्षिण नौलि
क्रिया विधि:
श्वास को बाहर निकाल कर पेट को खाली करें। बाएँ घुटने को किंचित दबाते हुए आंतरिक शक्ति से खाली पेट को दाहिने से बाएँ घुमाएँ, श्वास लेने की इच्छा पर क्रिया समाप्त करें, इस विधि को दक्षिण नौलि कहते हैं।
क्रिया नं. 1 से 10 तक के लाभ-
1. पेट के रागस्त विकार दूर होते हैं।
2. पेट के समस्त अंग शक्तिशाली बनते हैं।
3. पेट का मोटापा कम होता है।
4. साधक दीर्घ आयु वाला बनता है।
5. पाचन संस्थान अपना कार्य तीव्र गति से करता है।
6. नाभि केंद्र को ठीक रखने में सहायक है।
7. रक्त का संचार भली भाँति होने लगता है।
8. शरीर की सगस्त नाड़ियाँ शुद्ध बनती है।
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