ईशान शिक्षण संस्थान के संस्थापक ई.ओपी अग्रवाल का निधन, जिनकी प्रेरणादायक यात्रा और अनकहे-अनसुने किस्से सदा जीवित रहेंगे
ई. ओ. पी. अग्रवाल: इंजीनियरिंग और शिक्षा जगत के प्रणेता, समाजसेवा में अतुलनीय योगदान
हमारे जीवन में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपनी कड़ी मेहनत, समर्पण और उच्च विचारों के माध्यम से समाज में एक विशेष स्थान बना लेते हैं। 19 अक्टूबर 2024 को हमने ऐसे ही एक महान व्यक्तित्व, ई. ओ. पी. अग्रवाल जी को खो दिया। वे एक उच्च कोटि के इंजीनियर, समाजसेवी और ईशान शिक्षण संस्थान के संस्थापक थे, जिनका जीवन और कार्य समाज, शिक्षा और देश को नई दिशा देने वाला रहा है।
प्रारंभिक जीवन और परिवार
ई. ओ. पी. अग्रवाल जी का जन्म [स्थान] में हुआ था। उनके परिवार ने प्रारंभ से ही शिक्षा को महत्वपूर्ण माना और इसी कारण से उन्होंने विज्ञान और गणित में विशेष रुचि दिखाई। उनके परिश्रम और समर्पण ने उन्हें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की डिग्री दिलाई। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती ऊषा अग्रवाल, एक गृहणी, सरल और सहज स्वभाव की महिला हैं। उनके चार संतानों – विकास (चार्टर्ड अकाउंटेंट), विनीत (कम्प्यूटर इंजीनियर, यूएसए), नीतू गर्ग (कम्प्यूटर इंजीनियर), और अशुं अग्रवाल (आर्किटेक्ट) को उन्होंने सुसंस्कारित और शिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके सभी बच्चे आज उनकी बताई राह पर चलते हुए सफल जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
उत्कृष्ट करियर की यात्रा
अपने करियर की शुरुआत उन्होंने झांसी के लोक निर्माण विभाग में इंजीनियर के रूप में की। अपनी तकनीकी कौशल और मेहनत से उन्होंने जल्दी ही अपनी अलग पहचान बनाई। अपने सेवाकाल का अंतिम चरण उन्होंने भारतीय नौसेना मुख्यालय, नई दिल्ली में इंजीनियर (AE-Maintenance) के पद पर कार्य करते हुए पूरा किया। यहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम किया, जो उनके उच्च तकनीकी ज्ञान और समाज के प्रति समर्पण का प्रमाण है।
ईशान शिक्षण संस्थान की स्थापना और समाज पर प्रभाव
1994 में ई. ओ. पी. अग्रवाल जी ने शिक्षा के क्षेत्र में भी कदम रखा और ईशान शिक्षण संस्थान की स्थापना की। शुरुआत में कई कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद, उन्होंने अपनी मेहनत और समर्पण से संस्थान को एक प्रतिष्ठित शिक्षण केंद्र में बदल दिया। उनका सपना था कि समाज में शिक्षा का प्रसार हो, और इसी मकसद से उन्होंने ईशान एजुकेशनल रिसर्च सोसायटी की स्थापना की। इसके माध्यम से उन्होंने छात्रों और समाज के बीच शिक्षा का महत्व फैलाया। उन्होंने न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में, बल्कि समाज सेवा के कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया, जिससे अनेक लोगों का जीवन बदल सका।
अंतिम समय और अमर विरासत
ई. ओ. पी. अग्रवाल जी का निधन 19 अक्टूबर 2024 को हुआ, जो हम सभी के लिए एक बड़ी क्षति है। वे अपने परिवार के मुखिया, कॉलेज के संस्थापक और समाज के मार्गदर्शक थे। उनकी शिक्षाएँ, विचार और उनके द्वारा किए गए कार्य हमेशा हमारे साथ रहेंगे। उन्होंने जीवनभर जो अमूल्य योगदान दिया, उसकी गूंज सदियों तक सुनाई देगी।
उनकी प्रेरणादायक सोच और समर्पण की विरासत हम सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत है और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने की हमें सद्बुद्धि मिले, यही हमारी प्रार्थना है।
डॉ. डी. के. गर्ग द्वारा श्रद्धांजलि
“आपके बिना अधूरा है हर ख्वाब हमारा,
आप थे जो आशाओं का सच्चा सितारा।
समाज के लिए आपका योगदान अमिट है,
आपके बिना ये जीवन है जैसे एक किताब अधूरी।
इंजीनियरिंग की दुनिया में छाया आपका नाम,
कॉलेज की नींव में बसी आपका एहसास।
हर छात्र एवं स्टॉफ की आँखों में आपने भर दी रोशनी,
आपके सपनों की महक में बसी है सच्चाई की आवाज़।”
ई. ओ. पी. अग्रवाल जी की अनुपस्थिति आज भी हमारे दिलों में गहरा शोक भर देती है, पर उनकी प्रेरणा से हम आगे बढ़ते रहेंगे।
