रावण जन्मस्थली बिसरख धाम में विजयदशमी पर रावण की पूजा, महामंडलेश्वर आचार्य अशोकानंद जी महाराज ने देशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की, अस्त्र-शस्त्र, बही खाते, कृषि यंत्र आदि का किया पूजन
बिसरख, 12 अक्टूबर: शनिवार को बिसरख धाम, जो रावण की जन्म स्थली मानी जाती है, में विजयदशमी पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह पर्व धर्म और न्याय की जीत का प्रतीक माना जाता है, और इस अवसर पर भक्तों ने अपने घरों में गोबर के कूट बनाकर जिया-विजया देवियों की पूजा की।
विजयादशमी के इस खास दिन पर भक्तों ने अस्त्र-शस्त्र, बही खाते, कृषि यंत्र आदि का पूजन किया। पूजन विधि के बाद बहनों ने भाइयों के कानों पर नौरते रखे, जिससे भाई-बहन के रिश्ते में मिठास और प्रेम का संचार हुआ। भाइयों ने भी अपनी सामर्थ्य अनुसार बहनों को उपहार भेंट किए, इस प्रकार एक-दूसरे के प्रति प्रेम और समर्पण का परिचय दिया।
महामंडलेश्वर आचार्य अशोकानंद जी महाराज ने इस अवसर पर सभी देशवासियों के परिवारों हेतु सुख-शांति की कामना की। उन्होंने कहा, “विजयादशमी पर्व हमें सिखाता है कि असत्य पर सत्य की विजय अवश्य होती है।”
विजयादशमी के पूजन में अस्त्र-शस्त्र के अलावा पुस्तक, लक्ष्मी, सरस्वती, दीपक आदि का भी पूजन किया गया। अलग-अलग स्थानों पर प्रसाद का वितरण किया गया, जिसमें भक्तों ने एक-दूसरे को मिठाइयाँ और फल बाँटे।
व्यापारियों ने भी अपने बही खातों का पूजन किया, ताकि उन्हें व्यवसाय में सफलता मिले। इस दौरान बहनों ने भाइयों के कान पर नौरते रखकर उनकी दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। भाइयों ने भी बहनों को उपहार भेंट कर उनकी रक्षा का संकल्प लिया।
इस प्रकार, बिसरख धाम में विजयदशमी का पर्व एकता, प्रेम और भाईचारे के संदेश के साथ मनाया गया, जो सभी के लिए सुख-शांति का प्रतीक बना।
