श्री सनातन धर्म रामलीला समिति: माता सीता का पता लगा कर लौटे हनुमान, श्री राम को सौंपी चूड़ामणि
श्री सनातन धर्म रामलीला समिति, नोएडा द्वारा आयोजित रामलीला के 39वें वर्ष के अवसर पर आज एक भव्य मंचन का आयोजन किया गया, जिसमें दर्शकों ने अनेक अद्भुत दृश्य देखे। कार्यक्रम की शुरुआत हनुमान जी की लंका से वापसी और श्री राम को सीता की चूड़ामणि दिखाकर विश्वास दिलाने से हुई। यह दृश्य दर्शकों के दिलों में एक नई उम्मीद जगाने वाला था।
इसके बाद राम दल ने लंका की ओर प्रस्थान किया और समुद्र तट पर पहुंचे। यहां रावण का दरबार सजता है, जहां उसे यह सूचना मिलती है कि उसका शत्रु राम दल समुद्र तट के किनारे पहुंच चुका है। रावण अपने सेनापतियों से विचार-विमर्श करता है, तभी विभीषण बीच में बोल पड़ते हैं, जिससे रावण नाराज होकर उन्हें लंका से निष्कासित कर देता है।
अगले दृश्य में, राम दल समुद्र किनारे है, तभी उन्हें विभीषण के आगमन की सूचना मिलती है। श्री राम ने विभीषण का स्वागत किया और उनका राजतिलक किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि विभीषण राम के पक्ष में हैं।
राम दल समुद्र पार करने की योजना बना रहा होता है, तभी विभीषण जी सलाह देते हैं कि पहले रामेश्वरम पूजा करनी चाहिए। पूजा संपन्न होती है, लेकिन सेना को बैठे तीन दिन बीत जाते हैं। इस दौरान श्री राम में आक्रोश उत्पन्न होता है और वह अपना धनुष पर बाण चढ़ा देते हैं। इसी बीच, समुद्र देव प्रकट होकर समस्या का समाधान बताते हैं।
इसके बाद, नल-नील और उनकी सेना द्वारा समुद्र सेतु का निर्माण किया जाता है, जिससे राम दल लंका पहुंच जाता है। यह सूचना रावण को मिल जाती है। अगली कड़ी में, राम दल अंगद को रावण दरबार भेजता है, ताकि वह संधि का प्रस्ताव रख सके।
अंगद के रावण दरबार पहुंचने पर, रावण और अंगद के बीच संवाद होता है, जिसके परिणामस्वरूप युद्ध का ऐलान होता है। युद्ध की सूचना अंगद द्वारा राम दल में दी जाती है और युद्ध की शुरुआत होती है। रावण दरबार से इंद्रजीत युद्ध के लिए निकलता है, और लक्ष्मण के साथ भयंकर युद्ध होता है। लक्ष्मण को बाण लग जाता है, जिससे राम दल में निराशा छा जाती है।
विभीषण द्वारा इस स्थिति के समाधान के लिए सुषेण वैध को बुलवाया जाता है, और हनुमान जी को संजीवनी बूटी लाने के लिए भेजा जाता है। हनुमान जी बूटी की खोज में निकलते हैं, लेकिन कालनेवी उन्हें भटकाने का प्रयास करते हैं। हनुमान जी उनका सामना कर उन्हें पराजित करते हैं और अंततः बूटी लेकर लौटते हैं।
जब हनुमान जी बूटी के साथ लौटते हैं, तो उन्हें भरत द्वारा बाण से मूर्छित कर दिया जाता है। इसके बाद, दोनों के बीच वार्तालाप होता है और हनुमान जी आगे बढ़ते हैं।
इस बीच, राम दल निराश बैठा होता है और हनुमान जी का इंतजार कर रहा होता है। जब हनुमान जी लौटते हैं और लक्ष्मण की मूर्छा को संजीवनी बूटी द्वारा तोड़ते हैं, तो राम दल में खुशी की लहर दौड़ जाती है।
आज के कार्यक्रम में उपस्थित भक्तों में टी एन गोविल, टी एन चैरसिया, सुषील भारद्वाज, संजय बाली महासचिव, अल्पेष गर्ग, पीयूश द्विवेदी, मनीश मिश्रा, सौरभ, यतेन्द्र शर्मा, मुकेश गोयल, विपिन मल्हन, राकेश कत्याल, कुलदीप गुप्ता, अनिल गुप्ता, मित्रा शर्मा, मनोज शर्मा, रामरतन शर्मा, संजय गोयल, सुंदर सिंह राणा, आनंद मोहन, मनीश कटियार, दीपक गौतम, पवन सिंह, प्रमोद रंगा, प्रताप मेहता, पंकज जिंदल, रमेश कुमार, डा. अरविंद गर्ग, मुकेश शर्मा, वीरेंद्र तिवारी, डी.के. मित्तल, पी एस बंसल, जतिन गोविल, शिखर गुप्ता, हरिकिशोर, अनूप कटियार, संदीप पाठक, अर्पित गोयल, भारत भूषण शर्मा, राहुल गौतम, रविकांत पुरी, बी.के. शर्मा, तुषार गोयल, प्रवेश बंसल, सतेन्द्र शर्मा, विशाल कश्यप, विनय मेहता समेत अनेक भक्तगण उपस्थित रहे।
इस अद्भुत मंचन ने दर्शकों के दिलों में राम के प्रति आस्था और विश्वास को और भी मजबूत किया।
