नवरात्रि के सप्तम दिन करें मां कालरात्रि की आराधना, तंत्र-मंत्र और कृत्या प्रहार से मिलेगी मुक्ति: बता रहे हैं ज्योतिष परामर्शदाता ऋषि वशिष्ठ
दिल्ली – नवरात्रि की सप्तमी तिथि को माता का कालरात्रि का पूजन विशेष रूप से किया जाता है। जो लोग किसी कृत्या प्रहार से पीड़ित हैं या जिन पर किसी अन्य तंत्र-मंत्र का प्रयोग हुआ है, वे कालरात्रि माता की साधना कर समस्त कृत्याओं एवं शत्रुओं से निवृत्ति प्राप्त कर सकते हैं।
दुर्गा का सप्तम रूप कालरात्रि को महायोगिनी और महायोगीश्वरी कहा गया है। यह नागदौन औषधि के रूप में जानी जाती है, जो सभी प्रकार के रोगों को नष्ट करने वाली और सर्वत्र विजय दिलाने वाली है। मन और मस्तिष्क के विकारों को दूर करने में भी यह औषधि महत्वपूर्ण है। इस कालरात्रि की आराधना प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति के लिए अत्यंत लाभकारी है। विशेषकर इस दिन देवी को गुड़ का भोग लगाकर प्रसाद के रूप में खाना सेहत के लिए फायदेमंद होता है।
मां कालरात्रि की पूजन विधि:
1. नवरात्रि की सप्तमी तिथि को सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर पूजा शुरू करें।
2. मां कालरात्रि को रोली, अक्षत, दीप और धूप अर्पित करें।
3. माता को रातरानी का फूल चढ़ाएं।
4. गुड़ का भोग अर्पित करें।
5. मां की आरती करें।
6. दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा और मंत्र जपें।
7. लाल कंबल के आसन पर बैठकर लाला चंदन की माला से मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप करें। अगर लाला चंदन की माला उपलब्ध न हो, तो रुद्राक्ष की माला का उपयोग कर सकते हैं।
मंत्र:
‘ॐ कालरात्र्यै नमः।’
उपासना मंत्र: एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी। वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥
स्वप्न दर्शन के फल शास्त्रों में कई बतलाए गए हैं। यदि कोई खराब फल देने वाला स्वप्न देखें, तो उसे अच्छा बनाने के लिए प्रात: एक माला जपने से बुरा फल नष्ट होकर अच्छा फल मिलता है।
औषधि: नागदौन का पौधा सुख देने वाला और सभी प्रकार के विषों का नाशक होता है। इसका पौधा ग्वारपाठे के समान होता है, परंतु इसके पत्ते पतले और तलवार के जैसे होते हैं। यदि व्यक्ति इसे अपने घर में लगाता है, तो घर के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
सम्पर्क सूत्र: ऋषि वशिष्ठ परामर्शदाता (योग एवं ज्योतिष) 9259257034
