2024 के बजट से प्रमुख निष्कर्ष, बता रही हैं सीए फाल्गुनी श्रीवास्तव
Individual/HUF/AOP/BOI/AJP के लिए संशोधित स्लैब दरें:

स्टैण्डर्ड डिडक्शन 50,000 से बढ़ाकर 75,000 कर दी गई है।
कर्मचारी की मृत्यु के बाद नियोक्ता से कर्मचारी के परिवार को प्राप्त पारिवारिक पेंशन पर एक्सेम्पशन 15,000 प्रति वर्ष से बढ़ाकर 25,000 कर दी गई है।
वित्त्तीय संपत्ति पर शार्ट टर्म कैपिटल गेन 15% से अब 20% कर दिया गया है।
वित्त्तीय संपत्ति और गैर वित्त्तीय संपत्ति पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन 12.5% से लगेगा। इंडेक्सेशन को अब हटा दिया गया है।
फाइनेंसियल एसेट पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 1.25 लाख प्रति वर्ष कर दी गई है।
विदेशी कंपनियों पर कॉर्पोरेट कर दर 40% से घटाकर 35% कर दी गई है।
सभी प्रकार के निवेशकों पर एंजेल टैक्स का उन्मूलन कर दिया गया है, जो पहले 30.9% लगाया जाता था।
नियोक्ता द्वारा NPS की ओर किए गए व्यय की कटौती कर्मचारी के वेतन का 10% से बढ़ाकर 14% कर दी गई है। नई रेजिम के तहत निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए भी यही बढ़ोतरी की गई है।
आयकर अधिनियम, 1961 के तहत अपील के लिए संशोधित मोनेटरी सीमा:

रिवाइज्ड टाइम लिमिट्स फॉर इनकम एस्केपिंग असेसमेंट/ री-अस्सेस्मेंट/री-ओपनिंग ऑफ़ केसेस के पुनः खोलने की
संशोधित समय सीमा:
जहां इनकम एस्केप्ड 50 लाख और या अधिक है , नोटिस जारी करने की समय सीमा 10 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दी गई है।
मुद्रा लोन की सीमा को बढ़ाकर 20 लाख कर दिया गया है, जो पहले केवल 10 लाख थी, केवल उन लोगों के लिए जिन्होंने पहले इस सुविधा का लाभ उठाया है और लोन राशि का पूरी तरह से भुगतान किया है।
अगर गुड्स इम्पोर्ट करे है रिपेयर करने को जो की वारंटी में थे तो उनको इम्पोर्ट करने की लिमिट 3 साल से बढ़ा कर 5 साल कर दी गयी है और उनको सही करने के बाद वापस एक्सपोर्ट करने की लिमिट 6 महीने से बढ़ा कर 1 साल कर दी गयी है।
डोमेस्टिक इंस्टीटूशन में पढ़ने के लिए शैक्षिक लोन 10 लाख तक के प्रदान किए जाएंगे।
एक्विलिजेशन लेवि की 2% दर की वापसी।
बेनामेदारों को पूर्ण और सच्चे प्रकटीकरण पर दंड और प्रॉसिक्यूशन से प्रतिरक्षा प्रदान की जाएगी।
कंपनी द्वारा शेयरों की बायबैक अब कंपनी के बजाय शेयरहोल्डर के हाथों में कर लगेगी। पहले यह कंपनी के हाथों में 20% पर टैक्स लगाया जाता था।
म्यूचुअल फंड या यूटीआई द्वारा इकाइयों की पुनर्खरीद पर टीडीएस @20% हटा दिया गया है।
टीडीएस रिटर्न दाखिल करने की नियत तिथि तक टीडीएस का भुगतान न करने को अब से अपराध नहीं माना जाएगा।
संशोधित टीडीएस दरें:


नया टीडीएस अनुभाग- 194 T (1 अप्रैल 2025 से प्रभावी):
फर्म द्वारा अपने पार्टनर को वेतन, पारिश्रमिक, कमीशन, बोनस या ब्याज के रूप में भुगतान की जाने वाली किसी भी राशि पर टीडीएस 10% की दर से काटा जाएगा यदि वित्तीय वर्ष के दौरान ऐसी राशि ₹20,000 से अधिक हो जाती है।
वर्किंग पार्टनर्स को दी जाने वाली रेमनेरशन की कैलकुलेशन की लिमिट में बदलाव किया गया है।

रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं:
सभी औपचारिक क्षेत्रों में नए कार्यबल में शामिल होने वाले व्यक्तियों को 1 महीने की वेतन दी जाएगी। यह 3 किस्तों में 15,000 रुपये तक दिया जाएगा। बशर्ते कि वेतन राशि 1 लाख प्रति माह से अधिक न हो। यह ईपीएफओ नामांकन पर आधारित होगा।
तो सपोर्ट एम्प्लायर – 1 लाख रुपये प्रति माह के वेतन के भीतर सभी अतिरिक्त रोजगार को प्रत्येक अतिरिक्त कर्मचारी पर ईपीएफओ योगदान के लिए 2 वर्षों के लिए प्रति माह 3000 रुपये की प्रतिपूर्ति के लिए गिना जाएगा।
पहली बार कर्मचारियों के रोजगार से जुड़े विनिर्माण क्षेत्रों के लिए, रोजगार के पहले 4 वर्षों के लिए ईपीएफओ योगदान के संबंध में एम्प्लायर और कर्मचारी दोनों को प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा।
