ट्रिपल तलाक़ पर ऐतिहासिक बिल लोकसभा में पारित, सारे संशोधन हुए खारिज

नई दिल्ली। ट्रिपल तलाक से सम्बंधित विधेयक बिना किसी संशोधन के पारित हो गया है। सारे संशोधन खारिज कर दिए गए। अब यह बिल राज्‍यसभा में पेश किया जाएगा। लंबी बहस के बाद आज तीन तलाक पर ऐतिहासिक बिल लोकसभा में पास हो गया है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विधेयक को पेश किया। बिल पर चर्चा के बाद हुई वोटिंग के बाद ये पास हुआ। बिल के खिलाफ सारे संशोधन खारिज हो गए थे। इस बिल के खिलाफ कुल 19 संशोधन थे। एमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के भी 2 संशोधन थे। इस पर राजद, ओवैसी व अन्‍य कुछ दलों द्वारा विरोध जताया गया वहीं कांग्रेस की ओर से इसे समर्थन दिया गया है। लेकिन कांग्रेस ने इसमें कुछ खामियों का उल्‍लेख करते हुए स्‍टैंडिंग कमेटी के पास भेजने की मांग की जिसे सरकार ने ठुकरा दिया।

शीतकालीन सत्र में आज को सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को राहत देने वाला तीन तलाक पर बिल लोकसभा में पेश कर दिया। बिल पेश होते ही विपक्ष के सासंदों ने इसका विरोध किया वहीं कांग्रेस ने इस बिल का समर्थन किया है लेकिन कुछ शर्तों के साथ। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम इस बिल का समर्थन करेंगे लेकिन इसमें कुछ मुद्दे हैं जिन्हें ठीक किया जाना है। हम बैठकर इस मुद्दे पर बात कर लेंगे। इस पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि बिल का समर्थन करने के लिए कांग्रेस का धन्यवाद और उनकी जो भी बातें हैं वो सुनकर बिल में जरूरी हुआ तो सुधार किया जाएगा। इससे पहले बिल पेश होते ही विपक्ष का कहना था कि इस बिल में तीन तलाक पर सजा के चलते परिवार प्रभावित होंगे। वहीं दूसरी तरफ खबर है कि कांग्रेस संसद में इस बिल का समर्थन कर सकती है लेकिन वो भी बिल में आपराधिक मामला दर्ज करने की बात को उठाएगी। इससे पहले सदन में बिल आते ही लोकसभा सांसद और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसका विरोध किया। ओवैसी ने इस बिल को महिला विरोधी करार देते हुए कहा कि यह बिल मूलभूत अधिकारों का हनन करता है साथ ही इसमें कई कानूनी खामियां भी हैं। वही इससे पहले बिल पेश करते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कि पीएम मोदी के रहते किसी मुस्लिम महिला के साथ अन्याय नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कानून बनाने को कहा था और उसी के आदेश का पालन हो रहा है। वहीं उन्होंने बिल का विरोध होने पर कहा कि जो लोग मानव अधिकारों की बात करते हैं वो बताएं की तीन तलाक की पीड़ित महिलाओं के मानव अधिकार नहीं है क्या।

बता दें कि सदन में पेश हुए बिल के मुताबिक किसी भी तरीके से एक बार में दिया गया तीन तलाक अवैध तथा शून्य होगा और उसके लिए पति को तीन साल की सजा होगी। केंद्रीय कैबिनेट ने बिल को मंजूरी दे दी है। लेकिन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बिल का विरोध करते हुए उसे वापस लेने या रोकने की मांग की है। बोर्ड ने बिल को असंवैधानिक तथा महिला विरोधी करार दिया है। सत्तारूढ़ दल भाजपा ने लोकसभा में ट्रिपल तलाक का बिल पारित कराने के लिए अपने सांसदों को तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। बिल पेश होने के पहले केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने सभी विपक्षी दलों से गुरुवार को संसद में ध्वनि मत से तीन तलाक विधेयक पारित कराने की अपील की है। संसद भवन के बाहर पत्रकारों से चर्चा में अनंत कुमार ने कहा कि विधेयक गुरुवार को संसद में पेश किया जाना है। अब तक संसद की कार्यवाही में मनमोहन सिंह के खिलाफ पीएम मोदी की टिप्पणी को लेकर बाधा डाली जा रही थी।

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