उ.प्र. रेरा में प्रोमोटर के लिए परियोजना की भूमि पर स्वत्व साबित करना अनिवार्य
- प्रोमोटर जिस भूमि पर परियोजना ले आते हैं, उस पर उनका स्वत्व होना आवश्यक है। प्रोमोटर जिस भूमि पर परियोजना ले आते हैं, उस पर उनका स्वत्व होना आवश्यक है।
- यदि परियोजना की भूमि किसी अन्य व्यक्ति या संस्था के स्वत्व में है, तो परियोजना के विकास के लिए प्रोमोटर के पास ऐसे भू-स्वामी की सहमति तथा उसके साथ पंजीकृत ज्वाइंट डेवलपमेन्ट एग्रीमेन्ट होना अनिवार्य है।
- ऐसा इसलिए कि परियोजना की भूमि पर स्वत्व या भू-स्वामी की सहमति तथा उसके साथ जे.डी.ए. होने की दशा में ही आवंटियों के पक्ष में कानूनन स्वत्व हस्तानान्तरित किया जाना सम्भव है।
- प्रोमोटर द्वारा स्वत्व या पंजीकृत जे.डी.ए. न प्रस्तुत करने से परियोजना के पंजीकरण में अड़चनें आती हैं और आवंटियों के पक्ष में विक्रय-विलेख में भी समस्याएं आती हैं।
उ.प्र. रेरा द्वारा दिनांक 16 मार्च, 2024 को आदेश जारी करके प्रोमोटर्स को निर्देश दिए हैं कि वह सुनिश्चित करें कि जिस भूमि पर परियोजना का विकास प्रस्तावित करते हैं तथा रेरा में पंजीकरण के लिए आते हैं उस पर उनका विधिक स्वत्व होना आवश्यक है। यदि परियोजना की भूमि पर किसी अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों का स्वत्व है तो रेरा अधिनियम के अनुसार यह अनिवार्य है कि प्रोमोटर द्वारा परियोजना के विकास के लिए ऐसे भू-स्वामी की लिखित सहमति प्राप्त की गयी हो और भू-स्वामी के साथ रजिस्टर्ड ज्वाइंट डेवलपमेन्ट एग्रीमेन्ट (जे.डी.ए.) निष्पादित किया गया हो। उ.प्र. रेरा द्वारा प्रोमोटर्स को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि उनके द्वारा रेरा में यह शपथ-पत्र दिया जाएगा कि परियोजना की भूमि भार मुक्त है और यदि उस पर कोई भार या देनदारी है तो प्रोमोटर द्वारा शपथ-पत्र के माध्यम से उसकी स्पष्ट घोषणा की जाएगी।
उ.प्र. रेरा द्वारा परियोजना की भूमि पर प्रोमोटर के स्वत्व तथा भार के सम्बन्ध में नियमानुसार समाधान करने के पश्चात परियोजना का पंजीकरण किया जाएगा।उ.प्र. रेरा द्वारा दिनांक 16 मार्च, 2024 को आदेश जारी करके प्रोमोटर्स को निर्देश दिए हैं कि वह सुनिश्चित करें कि जिस भूमि पर परियोजना का विकास प्रस्तावित करते हैं तथा रेरा में पंजीकरण के लिए आते हैं उस पर उनका विधिक स्वत्व होना आवश्यक है। यदि परियोजना की भूमि पर किसी अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों का स्वत्व है तो रेरा अधिनियम के अनुसार यह अनिवार्य है कि प्रोमोटर द्वारा परियोजना के विकास के लिए ऐसे भू-स्वामी की लिखित सहमति प्राप्त की गयी हो और भू-स्वामी के साथ रजिस्टर्ड ज्वाइंट डेवलपमेन्ट एग्रीमेन्ट (जे.डी.ए.) निष्पादित किया गया हो।
उ.प्र. रेरा द्वारा प्रोमोटर्स को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि उनके द्वारा रेरा में यह शपथ-पत्र दिया जाएगा कि परियोजना की भूमि भार मुक्त है और यदि उस पर कोई भार या देनदारी है तो प्रोमोटर द्वारा शपथ-पत्र के माध्यम से उसकी स्पष्ट घोषणा की जाएगी। उ.प्र. रेरा द्वारा परियोजना की भूमि पर प्रोमोटर के स्वत्व तथा भार के सम्बन्ध में नियमानुसार समाधान करने के पश्चात परियोजना का पंजीकरण किया जाएगा। उ.प्र. रेरा के अध्यक्ष श्री संजय भूसरेड्डी द्वारा इस सम्बन्ध में यह जानकारी दी गयी कि रेरा अधिनियम के प्राविधान बहुत स्पष्ट हैं कि प्रोमोटर द्वारा परियोजना की सी.सी. या ओ.सी. प्राप्त करने के पश्चात आवंटी के नाम पंजीकृत बैनामा सम्पादित किया जाएगा और इकाई का कब्जा हस्तगत किया जाएगा। उनके द्वारा यह जानकारी भी दी गयी कि यह स्थापित कानून है कि पंजीकृत बैनामे के माध्यम से वही व्यक्ति स्वत्व हस्तगत कर सकता है जिसके पास उस भूमि या सम्पत्ति का स्वत्व हो तथा भूमि भार मुक्त हो। अतः उ.प्र. रेरा द्वारा आवंटियों के हितों की सुरक्षा करने तथा उनको पंजीकृत बैनामे के साथ स्वत्व का हस्तानान्तरण सुनिश्चित करने के लिए यह आदेश जारी किए गए हैं।
परियोजना की भूमि पर प्रोमोटर का स्वत्व न होने पर या भूमि-स्वामी की सहमति तथा संयुक्त विकास अनुबन्ध न होने की स्थिति में परियोजनाओं के पंजीकरण आवेदन के निस्तारण में भी समस्याएं आती हैं तथा आवेदन पत्रों पर निर्णय में अनावश्यक विलम्ब होता है। रेरा द्वारा यह बातें प्रोमोटर्स को लगातार बतायी जाती रही हैं और अब उन्हें बहुत स्पष्ट रूप से यह जानकारी दे दी गयी है और इस सम्बन्ध में समस्त भ्रांतियों का भी समाधान कर दिया गया है।
