पूर्व सीएम मधु कोड़ा को कोयला घोटाले में जेल की सजा

नई दिल्ली : झारखंड में हुए कोयला घोटाला मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने मुख्य आरोपी मधु कोड़ा को तीन साल की जेल और 25 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई है।

उल्लेखनीय है कोयला घोटाला मामले में झारखंड के पूर्व सीएम मधु कोड़ा समेत चार अन्य को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने दोषी करार दे दिया था। मधु कोड़ा के अलावा पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता, झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव अशोक कुमार बसु और एक अन्य को घोटाले में संलिप्त पाते हुए अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी(आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 409 (सरकारी कर्मियों द्वारा आपराधिक विश्वासघात) और भ्रष्टाचार की रोकथाम अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।

इधर फैसला सुनाये जाने के बाद मधु कोड़ा ने कहा कि, “मुझे विश्वास था कि अदालत से मुझे राहत मिलेगी लेकिन फैसला इसके विरुद्ध आया। यह अदालत का फैसला है इसलिए मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करुंगा। लेकिन मैं इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करुंगा।” बता दें कि कोयला घोटाले में मधु कोड़ा को दो महीने की अंतरिम जमानत दिये जाने के बाद उन्होंने ये बातें कहीं।

ये हैं सीबीआइ के आरोप

यह मामला झारखंड में पलामू स्थित राजहरा नॉर्थ कोल ब्लॉक का आवंटन कोलकाता स्थित वीआइएसयूएल को देने में अनियमितताओं से जुड़ा है। सीबीआइ के अनुसार वीआइएसयूएल ने आठ जनवरी 2007 को राजहरा नॉर्थ कोल ब्लॉक के लिए आवेदन किया था। झारखंड सरकार और इस्पात मंत्रालय ने कंपनी को कोल ब्लॉक आवंटित नहीं करने की अनुशंसा की थी, लेकिन तत्कालीन कोयला सचिव एचसी गुप्ता और झारखंड के तत्कालीन मुख्य सचिव अशोक कुमार बसु की सदस्यता वाली 36वीं स्क्रीनिंग कमेटी ने अपने स्तर पर ही इस ब्लॉक को आवंटित करने की सिफारिश कर दी। इसी को आधार बनाकर बाद में झारखंड की तत्कालीन मधु कोड़ा सरकार ने इस कोल ब्लॉक को कंपनी को आवंटित कर दिया। उस समय एचसी गुप्ता ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी अंधेरे में रखा। उन्होंने इस तथ्य को छिपाया कि झारखंड सरकार ने वीआइएसयूएल को कोल ब्लॉक आवंटित नहीं करने की सिफारिश की है। सीबीआइ का कहना था कि कोड़ा, बसु और दो अन्य ने वीआइएसयूएल को कोल ब्लॉक आवंटित कराने के लिए साजिश रची थी।

सरकारी खजाने को 1.86 लाख करोड़ का नुकसान

कैग (भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक) ने मार्च 2012 में अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट में तत्कालीन संप्रग सरकार पर आरोप लगाया था कि उसने 2004 से 2009 तक की अवधि में कोल ब्लॉक का आवंटन गलत तरीके से किया है। इससे सरकारी खजाने को 1.86 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कैग रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने कई फर्मो को बिना किसी नीलामी के कोल ब्लॉक आवंटित किए थे।

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