दंडात्मक कार्यवाही से बचने के लिए पूर्व में जारी निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित कराये प्रोमोटर्स- उ.प्र. रेरा

• जारी किए गए निर्देशों की समीक्षा करते हुए प्रोमोटर्स द्वारा सभी के समय से अनुपालन न होने की बात सामने आई।
• रेरा अधिनियम के प्राविधानों के अन्तर्गत जारी निर्देशों का अनुपालन न करना एक दंडनीय कृत्य है।

लखनऊ/ गौतम बुद्ध नगर: आज उ.प्र. रेरा ने प्रोमोटर्स को पूर्व में जारी निर्देशों की समीक्षा की और यह पाया कि प्रोमोटर्स द्वारा उनका अनुपालन नहीं किया जा रहा है। इस संबन्ध में उ.प्र. रेरा ने पंजीकृत रियल एस्टेट परियोजनाओं के प्रोमोटर्स को कार्यालय नोटिस जारी किया है जिसमें पूर्व में जारी किए गए निर्देशों का समय से अनुपालन न होने पर आपत्ति जताई है और उनका अविलंब अनुपालन सुनिश्चित कराने को निर्देशित किया है। रेरा अधिनियम के प्राविधानों के अन्तर्गत रेरा से जारी निर्देशों का अनुपालन न करना एक दंडनीय कृत्य है जिसके जिम्मेदार स्वयं प्रोमोटर्स होंगे।

ज्ञातव्य है कि उ.प्र. रेरा ने प्रोमोटर्स को बिना रेरा पंजीयन के परियोजना का प्रचार प्रसार न करने, पंजीकृत परियोजनाओं के प्रोमोशन व विक्रय में परियोजना की रेरा पंजीयन सँख्या तथा रेरा पोर्टल का प्रमुखता से उल्लेख करने, परियोजनाओं से सम्बन्धित पत्राचार की प्रक्रिया को आधिकारिक व प्रभावी बनाने के लिए प्रोमोटर संस्थान के किसी जिम्मेदार निदेशक का विवरण उपलब्ध कराने, रेरा पोर्टल पर जानकार कार्मिकों द्वारा परियोजनाओं की जानकारी ठीक करते हुए समस्याओं का निस्तारण करने, उपभोक्ताओं की सुविधा हेतु परियोजनाओं से जुड़े सम्पर्क नम्बर सदैव क्रियाशील रखने, वृहद स्तर की परियोजनाओं के लिए हेल्पलाइन नम्बर रखने और उनपर जानकार व्यक्ति की नियुक्ति करने का निर्देश दिया था।

इसके अतिरिक्त नवीन परियोजनाओं के पंजीयन में तेजी लाने के लिए परियोजना सम्बन्धित सभी जानकारी भरने, तीनों बैंक खाते खोलने और स्थायी निर्देश की कॉपी पोर्टल पर अपलोड करने, उपभोक्ता के साथ अनुबन्ध केवल रेरा पोर्टल पर उपलब्ध प्रदेश सरकार द्वारा अनुमोदित एग्रीमेन्ट फॉर सेल के प्रारूप पर करने, पंजीयन विस्तार का लाभ प्राप्त करने के लिए सभी लंबित और वर्तमान त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट अपलोड करने और नियामक प्राधिकरण के निर्देशानुसार सामयिक जानकारी उपलब्ध कराना शामिल था।

निर्देशों की समीक्षा में यह पाया गया कि कुल 1810 अपेक्षित प्रोमोटर्स में से केवल 666 प्रोमोटर्स द्वारा पत्राचार हेतु निदेशक की जानकारी अपलोड की गई है। प्रोमोटर्स द्वारा परियोजनाओं का प्रचार प्रसार रेरा पंजीयन सँख्या और पोर्टल का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया जा रहा है। इस कारण लगभग 130 से ज्यादा विज्ञापनों में रेरा अधिनियम के अनुसार नोटिस प्रोमोटर्स को प्रेषित किए गए है। रेरा अधिनियम की धारा-37 में प्रदत्त शक्तियों के अनुरूप उ.प्र. रेरा ने सभी प्रोमोटर्स को कार्यालय नोटिस के माध्यम से पुनः निर्देश जारी किया है और धारा-63 के अन्तर्गत निर्देशों का अनुपालन न करना दंडनीय है।

उ.प्र. रेरा अध्यक्ष श्री संजय भूसरेड्डी के अनुसार, “रियल एस्टेट सेक्टर के हितधारकों को रेरा अधिनियम के प्राविधानों के अनुरूप ही कार्य करना होगा। यह सुनिश्चित करने के लिए ही निर्देश जारी किए गए थे और उनका अनुपालन करने से पंजीयन और पंजीयन विस्तार सहित अन्य कार्यों में पारदर्शिता, जिम्मेदारी और जवाबदेही आएगी। हम आशा करते है कि प्रोमोटर्स द्वारा जारी निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जाएगा।

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