3 दिन के अंदर दूसरी बार दिल्ली-NCR में भूकंप के तेज झटके

दिल्ली-NCR में भूकंप के तेज झटके:तीव्रता 5.6 आंकी गई, एपिसेंटर नेपाल; UP-उत्तराखंड में भी असर, 3 दिन में ऐसा दूसरी बार

नई दिल्ली: 4 नवंबर को भी नेपाल में आए भूकंप का असर दिल्ली-NCR में महसूस हुआ था। लोग अपने घरों से बाहर आ गए थे। (फाइल फोटो)
4 नवंबर को भी नेपाल में आए भूकंप का असर दिल्ली-NCR में महसूस हुआ था। लोग अपने घरों से बाहर आ गए थे।

दिल्ली-NCR में सोमवार को शाम 4 बजकर 16 मिनट पर फिर एक बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र नेपाल था। इसकी तीव्रता 5.6 आंकी गई। इसकी वजह से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी झटके महसूस किए गए।

4 नवंबर को भी रात 11:32 बजे नेपाल में 6.4 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 157 लोगों की मौत हुई थी। तब दिल्ली-NCR के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और बिहार की राजधानी पटना में भी झटके महसूस किए गए थे। हालांकि भारत में किसी तरह के जान-माल का नुकसान नहीं हुआ था।
2015 में आए भूकंप से काठमांडू 10 फीट तक खिसक गया था

एक्सपर्ट का दावा- अरावली पर्वतमाला की दरार एक्टिव हुई, आते रहेंगे भूकंप

भूगोल के जानकार डॉ. राजेंद्र सिंह राठौड़ के अनुसार अरावली पर्वतमाला के पूर्व में एक भ्रंश रेखा (दरार) है। यह भ्रंश रेखा राजस्थान के पूर्वी तट से होते हुए धर्मशाला तक जा कर मिलती है। इसमें राजस्थान के जयपुर, अजमेर, भरतपुर इलाके शामिल हैं।

एक्सपर्ट का कहना है कि अरावली पहाड़ में जो दरारें हैं, उनमें हलचल शुरू हो चुकी है। अब ऐसे भूकंप के झटके जयपुर समेत इससे सटे हुए अन्य इलाकों में भी आते रहेंगे। जयपुर जोन-2 और पश्चिमी राजस्थान जोन-3 में आता है। इसमें सामान्य भूकंप के झटके आते हैं।

नेपाल में साल 2015 में 7.8 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। इस दौरान करीब 9 हजार लोग मारे गए थे। इस भूकंप ने देश के भूगोल को भी बिगाड़ दिया था। यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज के टैक्टोनिक एक्सपर्ट जेम्स जैक्सन ने बताया कि भूकंप के बाद काठमांडू के नीचे की जमीन तीन मीटर यानी करीब 10 फीट दक्षिण की ओर खिसक गई। हालांकि दुनिया की सबसे बड़ी पर्वत चोटी एवरेस्ट के भूगोल में किसी बदलाव के संकेत नहीं हैं। नेपाल में आया यह भूकंप 20 बड़े परमाणु बमों जितना शक्तिशाली था।

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