जीएनआईओटी में सस्टेनेबिलिटी कॉन्क्लेव का आयोजन
जीएनआईओटी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज द्वारा सस्टेनेबिलिटी कॉन्क्लेव का आयोजन समर्पण क्लब के द्वारा आयोजित किया गया I संस्थान के निदेशक डॉ संजीव चतुर्वेदी जी के साथ आए हुए गणमान्य अतिथि तथा कॉलेज के प्रोफेसर ने दीप प्रज्ज्वलन करके इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया I निदेशक जी ने आए हुए प्रतिनिधियों का स्वागत तुलसी का पौधा देकर सम्मानित कियाI डॉक्टर संजीव चतुर्वेदी जी ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए सस्टेनेबिलिटी के बारे में और इसके लाभ और हानि को बतायाI इसके साथ ही साथ संस्थान के निदेशक जी ने बिसलरी के साथ एक एमओयू साइन कियाI
इस कार्यक्रम को पैनल चर्चा के माध्यम से सभी छात्र-छात्राओं को सस्टेनेबिलिटी के विषय में जानकारी दी गईI इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ निशांत कुमार सिंह जी कर रहे थेI इस कार्यक्रम के अतिथि श्री पारस सुलेजा जी जो कि संस्थापक है शायना ईकॉयूनिफाइड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के ,श्री विक्रांत जी फाउंडर ऑफ सोशल एक्शन फॉर फॉरेस्ट एंड एनवायरमेंट, शुभी सचान संस्थापक मैटेरियल लाइब्रेरी ऑफ़ इंडिया, श्री बायजू कुरान सीनियर एग्जीक्यूटिव बिसलेरी, श्री नितिन श्रीवास्तव जी को- फाउंडर और सीएमओ शायना ईकॉयूनिफाइड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड .डॉ निशांत जी ने इस निर्वाचित सभा को शुरू करते हुए प्रतिनिधियों से चर्चा की और भविष्य में सस्टेनेबिलिटी के प्रभाव पर बात कियाI डॉ निशांत जी ने प्रतिनिधियों से कई प्रश्नों को जानने का प्रयास किया उन्होंने सस्टेनेबिलिटी क्यों जरूरी है इसका क्या प्रभाव है इसे जानने का प्रयास किया .प्रतिनिधियों से इसके बारे पर भी चर्चा हुई की हर व्यक्ति का क्या सहयोग है इस सस्टेनेबिलिटी को लेकरI सरकार जो नए नियम बनाती है सस्टेनेबिलिटी को लेकर, इसमें हर व्यक्ति का क्या सहयोग होगा उस पर भी चर्चा हुईI बिसलेरी के प्रतिनिधि श्री बायजू कुरान से जानने का प्रयास किया कि कैसे बिसलेरी बॉटल को पुनः नवीनीकरण करती हैI इस बात पर भी चर्चा हुई कि कैसे सतत विकास के साथ डिजाइन सोच कैसे मदद कर सकती हैI संस्थान के सभी छात्र छात्राओं ने इस में बढ़ चढ़कर हिस्सा लियाI इस अवसर पर संस्थान के सीईओ श्री स्वदेश कुमार सिंह जी ने, चर्चा में सम्मिलित सभी अतिथियों को धन्यवाद करते हुए, आयोजकों को भी प्रोत्साहित किया कि इस तरीके के प्रयासों से ही एक विकसित राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता हैI जो न कि केवल वैज्ञानिक एवं वैश्विक परिवेश में ही अपनी अधिपत्य स्थापित कर सकता है, अपितु पर्यावरण एवं भूमंडल के सतत प्रयासों में भी पूर्ण इमानदारी से भागीदारी करेगाI कार्यक्रम के अंत में संस्थान के निदेशक डॉ संजीव चतुर्वेदी जी ने आए हुए गणमान्य अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया.
