“भारत दुनिया का सबसे सुंदर गुलदस्ता “Interfaith सर्वधर्म समभाव”

नव वर्ष के पावन पर्व पर आज सतरंग सभागार, फादर एग्नेल स्कूल, ग्रेटर नोएडा में एक विशेष कार्यक्रम “इंटरफेथ” का आयोजन किया गया जिसमें भारत के सभी धर्मों के राष्ट्रीय धर्माचार्य उपस्थित हुए । जिसमें गुरुद्वारा बंगला साहिब नई दिल्ली के मुख्य ग्रंथी जत्थेदार श्री रंजीत सिंह जी, बौद्ध धर्म के श्री डॉ. भिक्खु संघसेना जी, मुस्लिम धर्मगुरु प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ,जैन धर्म आचार्य श्री विवेक मुनि जी महाराज, आर्य समाज से स्वामी संपूर्णानंद जी , रविदासिया समाज से 108 श्री वीर सिंह जी हितकारी ,लोटस मंदिर से डॉक्टर ए के मर्चेंट ,ईसाई समाज से फादर डॉक्टर एम.डी. थॉमस, फादर फेलिक्स, फादर बेन्टो के साथ-साथ शिक्षा जगत व अनेक सामाजिक संगठनों के विभिन्न लोग उपस्थित रहे । यह कार्यक्रम भारतीय सर्व धर्म संसद एवं फादर एग्नेल स्कूल ग्रेटर नोएडा के संयुक्त तत्वाधान में मनाया गया । जिसकी अध्यक्षता भारतीय सर्व धर्म संसद के राष्ट्रीय संयोजक गोस्वामी सुशील जी महाराज ने की तथा संचालन फादर फेलिक्स के द्वारा किया गया।
गोस्वामी सुशील जी महाराज ने कहा कि भारत विश्व का सबसे सुंदर मनमोहक उद्यान है जिसमें भांति-भांति के अनंत रंगों के फूल खिलते हैं, जिनका नाम है हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, यहूदी, पारसी एवं अनेक पंत अनेकता में एकता की मिसाल पेश करते हैं और मिलजुल कर रहते हैं । उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब हम अपने धर्मों के साथ साथ भारतीय धर्म का भी अनुसरण करें ताकि भारत एक शक्तिशाली राष्ट्र बने और विश्व का मार्गदर्शन करें।
जैन आचार्य विवेक मुनि ने कहा कि विश्व में अहिंसा परमो धर्म का संदेश आज प्रसंगिक हो गया है ।जियो और जीने दो की भावना का पालन हम सभी लोगों को करना चाहिए ।

मुख्य ग्रंथि जत्थेदार रंजीत सिंह जी ने कहा कि सिख पंथ के गुरुओं ने बड़ा छोटा कोई नहीं, मिल बांट कर खाना , सभी धर्मों का आदर करना , ईश्वर एक है और हम सब उसकी संतान हैं का संदेश दिया है और यही आज की प्राथमिकता है ।
बौद्ध धर्म गुरु भिक्खु संघसेना ने कहा कि भगवान बुध का संदेश है कि घृणा घृणा से नहीं प्रेम से समाप्त होती है। जन-जन में “हमें युद्ध नहीं बुद्ध चाहिए” का संदेश पहुंचाना है।

प्रोफेसर सलीम इंजीनियर अपने संबोधन में कहा कि साल 2022 की शुरुआत होने को है हम ईश्वर से प्रार्थना करें कि यह वर्ष हम सभी देशवासियों के लिए खुशहाली और समृद्धि लाए और देश में शांति आपसी प्रेम और विश्वास का वातावरण मजबूत हो।
डॉ. एके मर्चेंट ने कहा कि क्रिसमस व नववर्ष के पावन पर्व पर एक बार फिर से ईसा मसीह के प्रेम व शांति के संदेश को विश्व में पहुंचाना मानव जाति का कर्तव्य बन गया है ।

आर्य समाज से स्वामी संपूर्णानंद सरस्वती जी ने कहा कि इस संसार के रचयिता परमपिता परमेश्वर हैं यदि हम उसे मानते हैं तो हम में से कोई भी अलग नहीं है । सह अस्तित्व की भावना के साथ हम सभी एक दूसरे से प्रेम पूर्वक व्यवहार करें जिससे भारत में भाईचारा बना रहे।

श्री वीर सिंह हितकारी जी ने कहा की आज का मनुष्य जाति, धर्म, क्षेत्र, भाषा, मत, पंथ, रंग, नस्ल, आदि के नाम पर अनेक धाराओं में बैठकर कठोरता की ओर बढ़ रहा है ऐसे समय में क्षमा के सागर भगवान ईसा मसीह, दया के सागर भगवान संत शिरोमणी जगतगुरु सतगुरु रविदास जी महाराज जैसे महान महापुरुषों के पावन संदेशों को आत्मसात करने की अत्यंत आवश्यकता है।

भारतीय सर्व धर्म संसद

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