श्रीराम मित्रमंडल नोएडा रामलीला मंचन : आकाश मार्ग से लगभग 100 फुट उँचाई से पहुँचे हनुमान संजीवनी लेने

‘‘विनय ना मानत जलध जड़ गए तीन दिन बीति। बोले राम सकोप तब भय बिनु होय ना प्रीति।’’

नोएडा। श्रीराम मित्र मण्डल रामलीला समिति द्वारा आयोजित रामलीला मंचन के नवें दिन मुख्य अतिथि अपरजिलाधिकारी वित्त्त अलीगढ़ बच्चू सिंह, नगर मजिस्ट्रेट महेंद्र कुमार सिंह, राष्ट्रीय प्रवक्ता विश्व हिंदू परिषद विनोदबंसल एवं अरुण कुमार श्रीवास्तव महाप्रबंधक बी०एस०एन०एल द्वारा दीप प्रज्जवलित कर लीला का शुभारंभकिया। श्रीराम मित्र मंडल समिति के महासचिव मुन्ना कुमार शर्मा जिला अधिकारी बी0 एन0 सिंह एवं वरिष्ठपुलिस अधीक्षक लव कुमार से मिले और सेक्टर 62 स्तिथ रामलीला मैदान मे सुरक्षा एवं यातायात की व्यवस्था चाकचौबंद करने व मेटल डिटेक्टर लगवाने मांग की। जिला अधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने सुरक्षा एवं यातायातव्यवस्था चाक चौबंद करने का आश्वाशन दिया ।

श्रीराम जी सभी वीरों के साथ मंत्रणा करके वानर सेना सहित समुंद्रतट पर पहुंचते है और समुंद्र पर पुल बनाने के लिए मंत्रणा होती हैं। इधर मंदोदरी रावण को समझाती हैं लेकिन रावणनहीं मानता। विभीषण के समझाने पर भी रावण नहीं मानता और अपमान करता है। विभीषण भगवान की शरण मेंचले जाते है। भगवान राम समुंद्र से रास्ता देने के लिए विनय करते है लेकिन समुंद्र के न मानने पर रामजी क्रोधकरते है ‘‘विनय ना मानत जलध जड़ गए तीन दिन बीति। बोले राम सकोप तब भय बिनु होय ना प्रीति।’’ तब समुंद्रभगवान के चरणों में गिरकर प्रार्थना करता है और उसके बाद नील नल अन्य वानरों के साथ पुल का निर्माण करते हैं।इसके बाद भगवान राम ने वहां पर सेतु बंध रामेश्वर की स्थापना की। ‘‘ लिंग थापि विधिवत कर पूजा। शिव समानप्रिय मोहि ना दूजा।’’ भगवान राम रावण को पुरोहित के रूप में बुलाते हैं साथ में सीता भी आती हैं और इस प्रकारविधि विधान से पूजा कराकर रामेश्वर की स्थापना होती हैं। राम जी रावण के दरबार में अंगद को दूत बनाकर भेजतेहैं। अंगद रावण से कहता है कि माता सीता को लौटा दो और प्रभु की शरण में आ जाओं लेकिन अहंकार वश रावणअंगद का उपहास उड़ाता है। तब अंगद अपना पैर रोपकर कहते हैं‘‘ जौं मम चरन सकहिं सठ टारी। फिरहिं रामु सीतामैं हारी।’’ लेकिन कोई योद्वा अंगद का पैर डिगा नहीं पाया। अंत में रावण उठता हैं और ज्यो ही अंगद का पैर पकड़नेउठता हैं अंगद कहते है कि अगर पैर पकड़ने हैं तो श्रीराम के पकड़ो। रावण लज्जित होता हैं और अंगद रामादल मेंपहुंच जाते हैं। श्रीराम सेना लंका में आक्रमण कर देती हैं। रावण अपने पुत्र मेघनाद को भेजता है। मेघनाद लक्ष्मण परशक्ति से प्रहार करता है और लक्ष्मण मूर्छित हो जाते है। हनुमान जी सुषेन वैद्य को लाते हैं जो संजीवनी लाने कोकहते हैं। हनुमान आकाश मार्ग से लगभग 100 फुट उँचाई से संजीवनी लेने जाते हैं जिसे देख दर्शक प्रसन्नता से झूमउठते हैं संजीवनी से लक्ष्मण की मूर्छा खुलती है। इसके बाद लक्ष्मण युद्व में मेघनाद का वध कर देते हैं। इसके बादरावण कुभकरण को जगाता है। कुभकरण के पराक्रम से राम सेना में खलबली मच जाती है‘‘ नाथ भूधराकार सरीरा।कुंभकरन आवत रनधीरा।’’ तब भगवान श्रीराम बाणों से उस पर प्रहार करते है और कुंभकरण का वध कर देते है।कुभकरण वध के पश्चात अहिरावण भगवान श्रीराम से युद्व करता

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