रेडियोलॉजी के नवीनतम उपचारों से रूबरू कराया ,शारदा अस्पताल में जुटे रेडियोलॉजी के दिग्गज, गंभीर बीमारी के उपचार में नई तकनीकी पर रखे विचार

शारदा अस्पताल की ओर से आयोजित सेमिनार में रेडियोलॉजी की नवीनतम जांच प्रणाली से रूबरू कराया। इस दौरान एक्सपर्ट डॉक्टरों ने बताया कि कैसे रेडियोलॉजी की तकनीकी ने मरीजों को मौत के मुंह से खींच लिया।
स्कूल ऑफ मेडिकल साइसं एंड रिसर्च में रेडियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ विशाल गुप्ता ने बताया कि आज इलाज में रेडियोलॉजी की भूमिका का अपना महत्व है। अब मेडिकल का दायरा दिनोंदिन बढता जा रहा है। किसी भी बीमारी के सफल और सही इलाज के लिए पहले बीमारी की पहचान बेहद जरूरी है। बीमारी की पहचान के लिए कई बार मरीज के अंदरूनी हिस्सों की जांच की जाती है। रेडियोलॉजी को दो भागों में बांटा गया है। पहला डाइग्नोस्टिक रेडियोलॉजी और दूसरा थेराप्यूटिक रेडियोलॉजी। रेडियोलॉजी चिकित्सा विज्ञान की हाइटेक शाखा है, जो विभिन्न रोगों, शारीरिक गड़बडि़यों की पहचान और उपचार में मदद करती है। रेडियोलॉजी में निदान और उपचार दोनों तरह की विशेषज्ञता है। इस कारण अस्पताल सभी विभागों से इसका सीधा ताल्लुक है। विभिन्न प्रकार की तकनीकों के इस्तेमाल से मरीजों की स्थिति का पता लगाने में आसानी होती है।
रेडियोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ शबनम भंडारी ने बताया कि सम्मेलन में ब्रेन, चेस्ट, पेट और गर्भवती महिलाओं में होने वाली परेशानी को शुरू में ही जांच कर पता लगा लिया जाता है कि किस तरीके से इनका उपचार हो सकता है साथ ही बीमारी को बढने से रोकने में भी यह विधि काफी सहायक सिदृध होती है। रेडियोलॉजी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अलग.अलग टेस्ट के जरिए यह पता चल सकता है कि मरीज को क्या बीमारी है और उसे किस तरह का उपचार दिया जाना है। किसी किसी बीमारी में मरीज के पास बचने के चांस बहुत कम होते हैं, ऐसे में रेडियोलॉजी से ही उसका टेस्ट कर समय से उपचार शुरू किया जाता है।
कार्यक्रम के संयोजक वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट डॉ अमित गुप्ता ने बताया कि इस सेमिनार दिल्ली और एनसीआर के डॉक्टरों ने आधुनिक चिकित्सा पदृधति के बारे में नवीनतम जानकारी साझा की। इसमें जो सबसे महत्वपूर्ण तथ्य या जानकारी सामने उभरकर आई वह है कैसे मरीजों को समय रहते हम जांच कर उपचार दे सकते हैं। कार्यक्रम की शुरूआत शारदा अस्पताल के सलाहकार और एर्म्स टॉमा सेंटर के पूर्व निदेशक डॉ एमसी मिश्रा, डॉ एस के भार्गव, डॉ अशोक खुराना और डॉ आर पी त्रिपाठी आदि वरिष्ठ चिकित्सकों ने अपने अनुभवों से की।

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