जाने कहां चल रहीं हैं विदेशी मेहमानों के आगमन की तैयारियां ? प्रवास के दौरान नहीं होगी इन्हें कोई परेशानी

सर्दियों का मौसम शुरू होते ही ठण्डे स्थानों से पक्षी बड़ी में संख्या हजारों किलोमीटर की दूरी तय करके भारत के विभिन्न स्थानों का रूख करते हैं। उत्तर भारत में भी कई ऐसे स्थान है जो सर्दियों के मौसम में इन विदेशी महमानों की मेजबानी करते हैं। इनमें गौतम बुद्ध नगर के नोएडा और ग्रेटर नोएडा भी शामिल हैं। इस बार प्रशसन इन विदेशी महमानों की मेजबानी के लिए पहले से ही तैयारियां शुरू कर चुका है, जिससे इन्हें किसी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े।

कहां चल रहीं हैं तैयारियां

दनकौर क्षेत्र स्थित धनौरी वेटलैंड हमेंषा से प्रवासी पक्षियों को सर्दियों के मौसम में अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। यहां पर बड़ी संख्या में भारतीय प्रजाति के सारस पाए जाते हैं। इस क्षेत्र में तेजी से नगरीय एवं ढांचागत विकास हो रहा है। इसका प्रभाव वेटलैंड पर भी पड़ रहा है। कई तरह की जलीय वनस्पति भी इन विदेशी मेहमानों के लिए परेशानी का कारण बनती है। कई पर्यावरणविदों ने इसकी शिकायत विभिन्न स्तरों पर की थी। मामले का संज्ञान लेते हुए प्रशासन समस्या के निदान की तैयारियां में जुट गया है।

क्या तैयारियां चल रही हैं ?
स्थानीय विधायक ठाकुर धीरेन्द्र सिंह ने बताया कि वेटलैंड में जलकुंभी के कारण मेहमान पक्षियों को यहां उतरने के साथ जलक्रीडा में दिक्कत होती है। देश के कई पक्षीप्रेमियों एवं पर्यावरणविदों ने वेटलैंड से जलकुंभी निकलवाने की मांग की थी। इसी कड़ी में कई पर्यावरणविद तथा विधायक एक विषेशज्ञ दल के साथ वैटलैंड पहुंचे और जलकुंभी की सफाई के अभियान का शुभारंभ कराया। इस कार्य में यमुना प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने डा. अरूणवीर सिंह के निर्देश पर हॉर्टिकल्चर विभाग ने जलकुंभी की सफाई का कार्य शुरू किया।

कहां-कहां से कौन-कौन से पक्षी यहां पहुंचते है ?
कहां-कहां से कौन-कौन से पक्षी यहां पहुंचते है ?
नवंबर महीने के शुरूआत से ही इन विदेशी मेहमानों का आना शुरू हो जात है। यहां मंगोलिया, उत्तरी अमेरिका, इंग्लैंड, आइसलैंड, साइबेरिया और यूरोप सहित कई अन्य स्थानों से भी पक्षी आते हैं। लगभग 45 प्रजाति के पक्षी यहां सर्दियों के मौसम में प्रवास करते है। इनमे ब्लैक हेडिड गुल, नॉर्दन शावलर बार्न स्वालो सहित ब्लैक टेल्ड गोडविट, ब्लैक नेट स्टार्क और मार्श हैरियर भी दिखाई पड़ते है। इनमें साइबेरियन पक्षियों की संख्या भी अच्छी खासी होती है।

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