श्री धार्मिक रामलीला पाई 1 : नारद मोह का सजीव मंचन देख गदगद हो उठे दर्शक

ग्रेटर नोएडा के ऐतिहासिक रामलीला मैदान बिरोडा मे रामलीला का शुभारंभ श्री सुशील गोस्वामी जी के कुशल निर्देशन में शुक्रवार को रावण कुंभकरण मेघनाथ की उत्पत्ति व नारद मोह से हुआ। जिसका प्रसंग व जीवंत मंचन देख दर्शक भावविभोर हो उठे।

लीला के मंचन में देवर्षि नारद घोर तपस्या में लीन हैं। उनकी तपस्या से देवराज इंद्र का सिंहासन डोलने लगता है। वे मित्र कामदेव से स्वर्ग की अप्सराओं द्वारा तपस्या भंग करने का आग्रह करते हैं। अप्सराओं के अथक प्रयास के बाद भी तपस्या भंग नहीं होती। इस बात को लेकर देवर्षि को अहंकार हो जाता है और वे कामदेव पर विजय की जानकारी भगवान शंकर व ब्रह्मा को देते हैं। दोनों यह समझाते हैं कि यह बात वे भगवान विष्णु को न बताएं, लेकिन नारद जी अभिमानवश भगवान को बता देते हैं।

अभिमान भंग करने के लिए भगवान विष्णु राजकुमारी विश्वमोहिनी का स्वयंवर आयोजित करते हैं। स्वयंवर के लिए नारद जी भगवान विष्णु से सुंदर रूप देने का आग्रह करते हैं। भगवान विष्णु उन्हें बंदर का रूप देते हैं। जब नारद जी स्वयंवर में पहुंचते हैं तो उनका उपहास होने लगता है। तब वे भगवान को श्राप देते हैं। इसके पश्चात लक्ष्मी व राजकुमारी दोनों ही भगवान के पास नहीं होती हैं तो नारद जी को गलती का अहसास होता है। इस तरह से नारद जी का अहंकार टूटता है। आनंद भाटी राजकुमार नागर शेर सिंह भाटी इलम सिंह नागर अजय नागर ममता तिवारी धीरेंद्र भाटी बालकिशन सफीपुर सुशील नागर चैनपाल प्रधान महेश शर्मा प्रदीप पंडित जी रोशनी सिंह पिंकी त्रिपाठी उमेश गौतम

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