योगेश कथुनिया: आठ साल की उम्र में मार गया था लकवा,कोच के बिना किया था अभ्यास

योगेश कथूनिया ने  पुरुषों की चक्का फेंक स्पर्धा के एफ56 वर्ग में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया। योगेश ने अपने छठे और अंतिम प्रयास में 44.38 मीटर चक्का फेंककर दूसरा स्थान हासिल किया। उनका पहला, तीसरा और चौथा प्रयास विफल रहा जबकि दूसरे और पांचवें प्रयास में उन्होंने क्रमश: 42.84 और 43.55 मीटर चक्का फेंका था। भारत का यह टोक्यो पैरालंपिक खेलों में तीसरा रजत पदक है। वहीं, इस स्पर्धा में ब्राजील के बतिस्ता डोस सांतोस ने 45.59 मीटर के साथ स्वर्ण जबकि क्यूबा के लियानार्डो डियाज अलडाना (43.36 मीटर) ने कांस्य पदक जीता।

 

कोच के बिना किया था अभ्यास
योगेश कथुनिया ने जीत के बाद कहा, ‘यह शानदार है। रजत पदक जीतने से मुझे पेरिस 2024 में स्वर्ण पदक जीतने के लिए अधिक प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा, ‘पिछले 18 महीनों में तैयारियां करना काफी मुश्किल रहा। भारत में लॉकडाउन के कारण छह महीने प्रत्येक स्टेडियम बंद रहा। कथुनिया ने कहा, ‘जब मैं रोजाना स्टेडियम जाने लगा तो मुझे स्वयं ही अभ्यास करना पड़ा। मेरे पास तब कोच नहीं था और मैं अब भी कोच के बिना अभ्यास कर रहा हूं। यह शानदार है कि मैं कोच के बिना भी रजत पदक जीतने में सफल रहा।’
अगली बार गोल्ड के लिए कड़ी मेहनत करेंगे
उन्होंने कहा कि वह अगली बार स्वर्ण पदक जीतने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे। कथुनिया ने कहा, ‘मैं कड़ी मेहनत करूंगा। मैं स्वर्ण पदक से केवल एक मीटर पीछे रहा लेकिन पेरिस में मैं विश्व रिकार्ड तोड़ने का प्रयास करूंगा। आज मेरा दिन नहीं था। मैं विश्व रिकार्ड तोड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार था लेकिन ऐसा नहीं कर पाया।

आठ साल की छोटी सी उम्र में लकवे का शिकार
दिल्ली के रहने वाले योगेश के लिए बचपन आसान नहीं था। आठ साल की छोटी सी उम्र में ही उन्हें लकवे का शिकार होना पड़ा। इस झटके के बाद भी उन्होंने अपने सपनों से समझौता नहीं किया। योगेश हमेशा बड़े-बड़े सपने देखते थे। स्कूल के दिनों में उन्हें कोचिंग की सुविधाएं नहीं मिली। सुविधाओं की कमी के कारण उन्हें अपने कौशल और प्रदर्शन में सुधार करने में कठिनाई हुई। माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद योगेश कथुनिया ने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज में दाखिला लिया। अपने कॉलेज के दिनों में कई कोचों ने उनके कौशल पर ध्यान दिया। उन्होंने जल्द ही जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में कोच सत्यपाल सिंह के संरक्षण में सीखना शुरू कर दिया। अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक संघ के अनुसार, योगेश ने 2019 में दुबई विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पुरुषों की डिस्कस थ्रो एफ56 स्पर्धा के फाइनल में कांस्य पदक जीतकर टोक्यो पैरालंपिक के लिए क्वालीफाई किया। योगेश ने अपने छठे प्रयास में 42.51 मीटर का थ्रो किया था।
उपलब्धियां
योगेश ने 2018 में बर्लिन में आयोजित पैरा-एथलेटिक्स ग्रां प्री में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने पुरुषों के डिस्कस एफ36 वर्ग स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड तोड़ा। उन्होंने 45.18 मीटर का थ्रो किया और चीन के कुइकिंग के 42.96 मीटर के विश्व रिकॉर्ड को तोड़ दिया,जो उन्होंने साल 2017 में हासिल किया था। इसके अलावा उन्होंने विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पुरुषों की डिस्कस थ्रो एफ56 श्रेणी स्पर्धा में 42.05 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक भी जीता।

 

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