ग्लोबल वार्मिंग : पीढियां भुगतने वाली है इंसानों के कुकर्मो की सज़ा, पढ़ें- जलवायु परिवर्तन पर UN की नई रिपोर्ट में ये 5 बड़ी बातें

जलवायु परिवर्तन के विज्ञान पर सोमवार को जारी संयुक्त राष्ट्र जलवायु पैनल की रिपोर्ट में भविष्य के लिए पांच संभावित परिदृश्यों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट गंभीर समस्या के खड़े होने के दावे कर रही है और कहा गया कि यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि मनुष्य कितनी जल्दी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को रोकता है।

संयुक्त राष्ट्र की जलवायु विज्ञान की एक रिपोर्ट में सोमवार को कहा गया है कि अत्यधिक हीट वेव जो पहले हर 50 साल में केवल एक बार आती थीं, अब ग्लोबल वार्मिंग के कारण हर दशक में एक बार आने लगी है, जबकि बारिश ज्यादा होने लगी है और सूखा भी अधिक पड़ने लगा है।

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा नियुक्त अंतर सरकारी पैनल द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में पांच महत्वपूर्ण पाइंट है, जो आपको पढ़ने चाहिए…

इंसानों को दोष

रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्व-औद्योगिक काल से होने वाली लगभग सभी वार्मिंग कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी हीट-ट्रैपिंग वाली गैसों के निकलने के कारण हुई थी। इसमें से अधिकांश मानव द्वारा जीवाश्म ईंधन – कोयला, तेल, लकड़ी और प्राकृतिक गैस जलाने का परिणाम है। वैज्ञानिकों का कहना है कि 19वीं शताब्दी के बाद से दर्ज तापमान वृद्धि का केवल एक पार्ट ही प्राकृतिक दवाब से आया हो सकता है।

 

गंभीर परिणाम

3,000 से अधिक पृष्ठ की रिपोर्ट का निष्कर्ष निकला है बर्फ पिघल रही है और समुद्र का स्तर बढ़ रहा है। मौसम की गंभीर होती घटनाएं- तूफान से लेकर हीट वेव तक – सब बढ़ रहे हैं और अधिक खतरनाक हो रहे हैं। वैज्ञानिक साफ तौर पर बार-बार कह रहे हैं कि 1.5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य शायद अब पहुंच से बाहर है क्योंकि 1 डिग्री सेल्सियस से अधिक की गर्मी पहले ही पड़ चुकी है और तापमान में और वृद्धि वातावरण में पहले से ही उत्सर्जन के कारण ‘लॉक’ हो जाती है।

IPCC

बता दें कि पैनल जलवायु परिवर्तन पर उच्च संभावित वैज्ञानिक सहमति प्रदान करने के लिए सरकारों और संगठनों द्वारा सामने रखे गए स्वतंत्र विशेषज्ञों से बना है। करोड़ों वैज्ञानिक ग्लोबल वार्मिंग के कई पहलुओं पर नियमित रिपोर्ट प्रदान करते हैं, जो सरकारें इस बात पर चर्चा करती हैं कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को रोकने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूल होने के लिए कौन से देश योगदान कर सकते हैं।

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