पीएम मोदी ने निर्यातकों को वर्चुअल प्लेटफॉर्म से किया संबोधित, 400 बिलियन डॉलर का निर्यात लक्ष्य हासिल करने की अपील की

नई दिल्ली 6 अगस्त 2021- भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विदेश में भारतीय मिशनों के प्रमुखों के साथ ही व्यापार और वाणिज्य क्षेत्र के शेयरहोल्डर्स और निर्यात संवर्धन परिषदों के साथ संवाद किया। इस संवाद में उन्होंने ‘लोकल गोज ग्लोबल – मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ का भी आह्वान किया। हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) ने इस मौके पर ग्रेटर नोएडा में एक्सपो मार्ट से अपने सदस्य निर्यातकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कनेक्टिविटी का आयोजन कर इसको विस्तार दिया। इस मौके पर ईपीसीएच के चेयरमैन श्री राजकुमार मल्होत्रा, हाल में ही चेयरमैन रहे श्री रवि के पासी, ईपीसीएच के वाइस चेयरमैन श्री कमल सोनी, सीओए सदस्य श्री प्रिंस मलिक, सीओए सदस्य और चेयरमैन हैंडीक्राफ्ट एंड कार्पेट सेक्टर सिल्क काउंसिल श्री अरशद मीर, ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक श्री रवि के वर्मा, सीओए के सदस्य सिमरनदीप सिंह कोहली, मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट एसोसिएशन के महासचिव श्री अवधेश अग्रवाल, दिल्ली से श्री अशोक अरोड़ा, श्री ऋषि सोनी, श्री लाली सिंह, श्री गांगुली, श्री दीपक गुप्ता, श्री विनीत भाटिया समेत सैकड़ों निर्यातक मौजूद रहे।

माननीय प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ग्लोबल वैल्यू चेन, लॉजिस्टिक लास्ट माइल कनेक्टिविटी, इज़ ऑफ़ डूइंड बिजनेस, निर्यात के लिए बीमा कवरेज, निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं को युक्ति संगत बनाने, एक ज़िला एक उत्पाद, विदेशों में प्रवासी भारतीयों की ताक़त का फ़ायदा उठाने, चुनौतियों के मुताबिक सुधार लाने, राज्य से निर्यात को प्राथमिकता देने और विदेशी बाज़ारों को लक्षित करने, नए बाज़ारों का पता लगाने के साथ नए उत्पादों की पहचान और खोज करने, विदेशी मिशनों के ज़रिए बाज़ार की समझ, गुणवत्ता और विश्वसनीयता के साथ मूल्य वर्धित उत्पादों को बनाने और स्टार्ट अप को प्रोत्साहित करने के साथ ही कई अन्य मुद्दों पर ज़ोर दिया. इस दौरान उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के लिए सरकार की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया.

ईपीसीएच ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव के साथ बैठक से पहले मुलाकात भी की । इस मुलाकात में ईपीसीएच ने उद्योग की आवश्यकता के रूप में निम्नलिखित बिंदुओं को प्रस्तुत किया था जिन्हें चीन में भारत के महामहिम राजदूत श्री विक्रम मिश्री द्वारा प्रमुखता से अच्छी तरह से संबोधित किया गया था। ईपीसीएच द्वारा प्रस्तुत पेपर में निम्नलिखित मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया:-

शुल्क मुक्त आयात प्रावधान की बहाली

कंटेनरों की अनुपलब्धता और कंटेनरों की ऊंची दर
वाणिज्य विभाग की एमएआई (माई) योजना में विदेशों में गोदाम खोलने के प्रावधान की बहाली
एमईआईएस की निधियां को जल्द जारी करना और रोडटेप दरों की घोषणा

निर्यात सेक्टर में विशेषकर एमएसएमई और हाई लेबर इंटेंसिव सेक्टरों में रोजगार की बड़ी संभावनाएं हैं। इसके साथ ही इसका मैन्यूफैक्चरिंग और पूरी अर्थव्यवस्था पर भी व्यापक प्रभाव होता है। माननीय प्रधानमंत्री के संवाद का उद्देश्य भारत के निर्यात और विश्व व्यापार में देश की भागीदारी बढाने और इसका व्यापक विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित करना था। इसके साथ ही संवाद का उद्देश्य हमारी निर्यात क्षमता को बढ़ाने और दुनिया भर के बाजारों की मांग को पूरा करने के लिए स्थानीय क्षमताओं का उपयोग करने के लिए सभी हितधारकों को सक्रिय करना भी रहा।

इस अवसर पर ईपीसीएच के अध्यक्ष श्री राज कुमार मल्होत्रा ने कहा कि भारत के माननीय प्रधानमंत्री का संबोधन बहुत उत्साहवर्धक था। यह निश्चित रूप से पूरे हस्तशिल्प निर्यातकों की बिरादरी को प्रोत्साहित करने वाला है, और इससे वे आने वाले वर्षों में उच्च निर्यात वृद्धि हासिल करने के लिए प्रयास करने को प्रेरित होंगे।

इस मौके पर हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद के महानिदेशक डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि भारत सरकार आर्थिक गतिविधियों के विस्तार और रोजगार के अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए निर्यात बढ़ाने पर बहुत जोर देती है। वाणिज्य विभाग ने चालू वित्त वर्ष 2021-22 में मर्चेंडाइज निर्यात के लिए 400 अरब अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य देश की निर्यात करने की बड़ी क्षमता, पिछले रुझानों और सरकार द्वारा की गई विभिन्न पहल को देखते हुए रखा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हमें उन आर्थिक गतिविधियों को तेजी से शुरू करना होगा जो कोविड -19 महामारी की वजह से बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं।

डॉ.कुमार ने अपनी बात को विस्तार देते हुए कहा कि वर्तमान महामारी की विपरीत परिस्थितियों को बावजूद वित्तीय वर्ष 2020-21 में हस्तशिल्प सेक्टर में 1.62 प्रतिशत की आंशिक वृद्धि हुई है और वर्तमान में यह 25,680 करोड़ रुपये के स्तर पर है। हस्तशिल्प के विशाल निर्यात संभावनाओं के चलते हमें उम्मीद है कि हम अगले पांच साल तक इसमें 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि देख सकेंगे और पांच साल में ये आंकड़ा 50,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य को पार कर लेगा।

बैठक को भारत के माननीय कपड़ा, वाणिज्य एवं उ्दयोग मंत्री श्री पीयूष गोयल, भारत के माननीय विदेश मंत्री श्री एस जयशंकर और बांग्लादेश, ब्राज़ील, चीन, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात व अन्य देशों में स्थित भारत के राजदूतों और उच्चायुक्तों ने भी संबोधित किया.

इस अवसर पर ईपीसीएच के महानिदेशक डॉक्टर राकेश कुमार ने सूचित किया कि वित्तीय वर्ष 2020-21 की अप्रैल-मार्च अवधि के लिए हस्तशिल्प निर्यात का अनुमानित आंकड़ा 25679.98 करोड़ रुपये (3459.75 मिलियन अमेरिकी डालर) है। बीते वर्ष की इसी अवधि की तुलना में रुपये के संदर्भ में इसमें 1.62% की आंशिक वृद्धि और डॉलर के संदर्भ में (-) 2.93% प्रतिशत की गिरावट दर्ज है। हालांकि वर्ष 2021-22 के अप्रैल-जून माह (तदर्थ) में कुल निर्यात 4642.76 करोड़ रुपये (629.27 मिलियन अमरीकी डॉलर) दर्ज किया गया है। निर्यात का यह आंकड़ा पिछले वर्ष तुलना में रुपये के संदर्भ में 82.89% और डॉलर के संदर्भ में 88.09% वृद्धि दर्शाता है।

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