संसद का मानसून सत्र: सदन चल नहीं रहा…करोड़ों रुपये स्वाहा, लेकिन मिनटों में हो रहे विधेयक पास

संसद के मानसून सत्र की शुरूआत के बाद यह तीसरा हफ्ता है जब संसद नहीं चल रहा है। पेगासस मुद्दे को लेकर विपक्ष अपने कड़े तेवर बनाए हुए है जबकि सरकार अपने रुख पर अड़ी हुई है। लगातार विपक्ष के हंगामे के कारण सदन के संचालन में बाधा पहुंच jरही है, लेकिन इस बीच विपक्ष के विरोध की परवाह किए बिना सरकार मिनटों में फटाफट कई अहम विधेयक पारित करा रही है।

 

संसद का सत्र सुचारु रुप से नहीं चलने से विधायी कार्यों का सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। दूसरे दलों की राय को अहमियत दिए बिना और चर्चा कराए बिना सरकार बिना बहस के कई अहम विधेयक मिनटों में पास करा रही है। ऐसा लग रहा है मानो विधेयक पास कराने की महज औपचारिकता पूरी की जा रही है। जबकि संसद को एक मिनट चलाने में करीब ढ़ाई लाख रुपये खर्च होते हैं और इस हिसाब से जनता के करोड़ों रूपये मानसून की बारिश की तरह बह रहे हैं।

 

एक नजर में देखिए कैसे मिनटों में हुए हैं अहम विधेयक पास… (स्रोत-पीआरएस)

वो विधेयक जो अब तक एक या दोनों सदनों से पारित

फैक्टरिंग रेगुलेशन (अमेंडमेंट) विधेयक 2021-
26 जुलाई को लोकसभा से 13 मिनट में पारित, इसमें बिल पेश करने वाला समय भी शामिल
राज्यसभा में यह बिल 14 मिनट में पारित, केवल पांच सांसदों ने बहस में हिस्सा लिया

द नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी इंटर्नप्नोयरशिप एंड मैनेजमेंट बिल
26 जुलाई को लोकसभा से छह मिनट में पारित

द मरीन एड्स टू नैविगेशन बिल 2021
27 जुलाई को राज्यसभा से 40 मिनट में पारित

जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटक्शन ऑफ चिल्ड्रन) अमेंडमेंट बिल, 2021
28 जुलाई को विपक्ष के शोर-शराबे के बीच राज्यसभा से 18 मिनट में पारित

द इन्सॉल्वेंसी एंड बैकरप्सी कोड (अमेंडमेंड) बिल 2021
28 जुलाई को पांच मिनट में लोकसभा से पारित

इनलैंड वेसल्स बिल 2021
29 जुलाई को छह मिनट में लोकसभा से और 33 मिनट में दो अगस्त को राज्यसभा से पारित करा लिया गया

द एयरपोर्ट इकोनॉमिक्स रेग्यूलैरिटी ऑथोरिटी (अमेंडमेंट) बिल 2021
29 जुलाई को 14 मिनट में लोकसभा से पारित

द कोकोनट डेवलपमेंट बोर्ड (अमेंडमेंट) बिल 2021
29 जुलाई को राज्यसभा से पांच मिनट में पारित

द जनरल इंश्योरेंस बिजनेस अमेंडमेंट बिल,2021
दो अगस्त को आठ मिनट के भीतर लोकसभा से पारित

फटाफट विधेयक पारित होने से आम आदमी का क्या नुकसान
संसद में किसी विधेयक पर कम चर्चा होने का मतलब है संसद में लोकतंत्र का नहीं होना।
बहस में विपक्ष के हिस्सा नहीं लेने का मतलब है दूसरे पक्ष का दृष्टिकोण शामिल नहीं होना
विधेयक एक बार पारित हो गया और कानून की शक्ल में बदल गया तो इसमें बदलाव लाने में फिर लंबा वक्त लग जाता है।
सांविधानिक दृष्टि से देखा जाए तो इसका असर करोड़ों भारतीयों के भविष्य पर पड़ेगा।

 

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