खराब रेटिंग: केंद्र की कसौटी पर पूरी तरह खरी नहीं उतरीं यूपी की बिजली कंपनियां, किसी को भी नहीं मिला ए या ए प्लस ग्रेड

उत्तर प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियां केंद्र सरकार की कसौटी पर पूरी तरह खरी नहीं उतर पाई हैं। केंद्रीय बिजली मंत्रालय की ओर से देश भर की सरकारी बिजली कंपनियों की 2019-20 की नवीं वार्षिक रेटिंग में प्रदेश की पांच में से केवल एक को बी प्लस व दो को बी ग्रेड मिला है। दो कंपनियों को सी प्लस ग्रेड मिल पाया है। प्रदेश की कोई भी बिजली कंपनी ए प्लस व ए ग्रेड नहीं हासिल कर पाई है।

 

रेटिंग एजेंसियों ने प्रदेश की बिजली कंपनियों की आपूर्ति से लेकर वित्तीय एवं प्रबंधकीय परफॉर्मेंस को बहुत ज्यादा संतोषजनक नहीं माना है। इसका असर केंद्र से मिलने वाली आर्थिक सहायता पर पड़ सकता है। भारत सरकार ने रेटिंग के आधार पर ही बिजली कंपनियों को वित्तीय सहायता देने का मानक तैयार किया है।

 

राज्यों के बिजली कंपनियों की खराब माली हालत के मद्देनजर भविष्य में वित्तीय सहायता मुहैया कराने की प्रक्रिया निर्धारित करने के लिए बिजली मंत्रालय ने एकीकृत मूल्यांकन प्रणाली का फॉर्मूला तैयार किया है। इसके तहत हर साल देश भर की सरकारी बिजली कंपनियों की रेटिंग कराई जाती है। लगातार 9वें साल की रेटिंग में भी यूपी की बिजली कंपनियों का प्रदर्शन दूसरे राज्यों के मुकाबले बहुत अच्छा नहीं रहा है। इतना जरूर है कि दो साल पहले तक प्रदेश की बिजली कंपनियां सबसे निचले पायदान पर रहती थीं। अब इसमें मामूली सुधार हुआ है, लेकिन बिजली कंपनियां शीर्ष ग्रेड में जगह बनाने से अभी काफी दूर हैं।

बिजली मंत्रालय ने रेटिंग की जिम्मेदारी पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (पीएफसी) को सौंपी है। पीएफसी की ओर से जारी 41 बिजली कंपनियों की रेटिंग में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम मेरठ बी प्लस ग्रेड के साथ 18वें पायदान पर है जबकि केस्को व मध्यांचल वितरण निगम बी ग्रेड के साथ क्रमश: 22वें व 24वें पायदान पर हैं। पूर्वांचल व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम सी प्लस ग्रेड के साथ क्रमश: 27वें व 29वें पायदान पर हैं। गुजरात, हरियाणा, पंजाब व महाराष्ट्र की बिजली कंपनियां रेटिंग में शीर्ष पर हैं।
रेटिंग के लिए तय मानक
रेटिंग एजेंसी ने परिचालकीय (ऑपरेशनल) एवं वित्तीय (फाइनेंशियल) प्रदर्शन के मानकों पर बिजली कंपनियों की ग्रेडिंग की है। इसमें बिजली कंपनियों को मिली वित्तीय सहायता, बिजली की आपूर्ति और उसके एवज में की जाने वाली वसूली का औसत, लाइन हानियां, नियामक गतिविधियां, टैरिफ प्रस्ताव का दाखिला, ऑडिटेड अकाउंट, सूचना प्रौद्योगिकी एवं कंप्यूटराइजेशन, बैंकों व वित्तीय संस्थाओं की देनदारियां, वैकल्पिक ऊर्जा खरीदने की अनिवार्यता का अनुपालन समेत अन्य बिंदु शामिल हैं।

बिजली कंपनियों के कामकाज में सुधार हो
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि सरकार को बिजली कंपनियों की परफार्मेंस में सुधार पर ध्यान देना चाहिए। बीते वर्षों के मुकाबले कुछ सुधार जरूर हुआ है लेकिन रेटिंग में शीर्ष पर जगह बनाने के लिए तेजी से सुधार की जरूरत है।

 

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