जानिए ओलंपिक खेलों में कब से शुरू हुई थी पदक देने की परंपरा

नई दिल्ली। टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए तैयारियां जारी हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि 1896 से एथेंस में शुरू हुई इस प्रतियोगिता में पहले पदक नहीं दिया जाता था। जी हां, ये सच है। ओलंपिक खेल के कई संस्करण गुजर जाने के बाद इन खेलों में पदक जेने की प्रतियोगिता शुरू हुई थी। 1904 में सेंट लुइस खेलों के दौरान ओलंपिक खेलों में पहली बार पहले तीन स्थानों पर आने वाले खिलाड़ियों को स्वर्ण पदक, रजत पदक और कांस्य पदक देने की परंपरा शुरू हुई

अस्तित्व की लड़ाई

सेंट लुइस ओलंपिक खेलों में भी पेरिस की गलतियां दोहराने के कारण यह आयोजन अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ता रहा। पिछले ओलंपिक की तरह ही इस बार बार भी साढ़े चार महीने तक इन खेलों का आयोजन हुआ। हालांकि, यह दुनिया का ध्यान आकर्षित करने में सफल नहीं हो सका। हालांकि, अगली बार जब 1908 में ओलंपिक खेलों का आयोजन हुआ तो पहली बार ऐसा था जब इन खेलों का आयोजन यूरोप के बाहर हुआ था।

खिलाड़ियों को पदक देने की परंपरा सेंट लुइस ओलंपिक से शुरू हुई। लंदन ओलंपिक से ही खेलों के इस महाकुंभ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। पहली बार यह खेल यूरोप के बाहर आयोजित किए गए। साल 1912 में लंदन में हुए ओलंपिक खेलों का आयोजन इटली में होना था, पर वहां विसुवियस ज्वालामुखी के फटने के कारण उसने मेजबानी से अपना नाम वापस ले लिया। लंदन में आयोजन जल्दबाजी में किया गया। पहली बार राष्ट्रीय ध्वज शामिल किए गए, जिससे इन खेलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।

 

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