डेल्टा प्लस वैरिएंट के बढ़ रहे केस, जानिए- किस राज्य में आए हैं कितने मामले
नई दिल्ली (एजेंसियां)। देश में डेल्टा प्लस वैरिएंट लगातार पांव पसार रहा है। एएनआई की खबर के मुताबिक देश में अब तक डेल्टा प्लस वैरिएंट के कुल 40 मामले सामने आए हैं। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इसके पांच मामलों की पुष्टि अब तक हुई है। राज्य के एडिशनल चीफ सेक्रेट्री स्वास्थ्य मोहम्मद सुलेमान के मुताबिक राज्य में जो वैक्सीन लोगों को दी जा रही है वो इस डेल्टा प्लस वैरिएंट पर भी कारगर है। स्वास्थ्य विभाग ने ये भी कहा है कि जिन पांच लोगों में डेल्टा प्लस वैरिएंट के होने की पुष्टि हुई है उन सभी को वैक्सीन दी गई थी। हालांकि इनको अस्पताल में भर्ती करने की संभावनाओं से इनकार किया है। समाचार एजेंसी के मुताबिक मध्य प्रदेश ऐसा पांचवां राज्य है जहां पर एनसीडीसी ने वायरस के जिनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा उपलब्ध करवाई है। मध्य प्रदेश में सामने आने वाले मामले यहां के उज्जैन, रायसेन, अशोक नगर और भोपाल जिले से हैं।
आपको बता दें कि मध्य प्रदशे देश के उन तीन राज्यों में शामिल है जहां पर कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान डेल्टा वैरिएंट में हुए बदलाव और फिर सामने आने वाले डेल्टा प्लस वैरिंएट (AY.1) की पुष्टि हुई है। इसके अलावा केरल, जम्मू कश्मीर और महाराष्ट्र में भी इस वैरिएंट के मामले सामने आ चुके हैं।
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक तमिलनाडु में चेन्नई में एक नर्स डेल्टा वेरिएंट से पीडि़त पाई गई है। राज्य के स्वास्थ्य सचिव राधाकृष्णन ने इसकी जानकारी देते हुए बताया है कि 32 वर्षीय महिला एक अस्पताल में नर्स का काम करती है। राज्य की तरफ से जिनोम सिक्वेंसिंग के लिए करीब 1159 सैंपल भेजे गए थे, जिनमें से 772 की जांच हो सकी है। इनमें डेल्टा प्लस वैरिएंट का एक मामला सामने आया है।
एएनआई की खबर के मुताबिक आसीएमआर ने महामारी की तीसरी लहर आने की आशंकाओं के बीच कहा है कि डेल्टा प्लस वैरिएंट को कारण बताना जल्दबाजी होगी। आईसीएमआर के मुताबिक फिलहाल इसको लेकर चिंतित होने की भी जरूरत नहीं हैं। आइसीएमआर) के विज्ञानी और महामारी विज्ञान व संचारी रोग विभाग के कार्यक्रम अधिकारी डा.सुमित अग्रवाल के मुताबिक एमआरएनए वायरस में बदलाव होना उसकी एक सामान्य प्रवृत्ति है। इसको नियंत्रित भी नहीं किया जा सकता है। समय बीतने के साथ इसकी प्रवृति के बारे में भी पता लगाया जा सकेगा। उनका ये भी कहा है कि आने वाले समय में इस वायरस में और बदलाव आ सकते हैं। डेल्टा वैरिएंट के तीन लक्षणों में इसका तेजी से संक्रमण, हाई एफिनिटी है और इस पर मोनोक्लोनल एंटीबाडी थेरेपी के बहुत कारगर साबित न होने की बात सामने आई है।
