41 दिवसीय संकट मोचन महायज्ञ : चौथे दिन की आहुति पूर्ण हुई, हवन में स्वाहा क्यों बोलते हैं जानिए
ग्रेटर नोएडा: 41 दिवसीय संकट मोचन महायज्ञ में आज चौथे दिन की आहुति पूर्ण हुई । ट्रस्ट के संयोजक सतेन्द्र राघव ने जानकारी देते हुए बताया कि आज के संकट मोचन महायज्ञ में स्वाहा एवं स्वधा के महत्व को समझाते हुए आचार्य प्रकाश उपाध्याय आज के हवन को मां भगवती को समर्पित करते हुए संकट मोचन श्री बालाजी महाराज को अर्पण किया जैसे हम मंत्र का उच्चारण करते हैं ओम जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते जितने भी हवन होते हैं उन सब हवनओं में स्वाहा के उच्चारण से आहुति प्रदान की जाती है स्वाहा जो शब्द है वह देवताओं को भोजन अर्पण करने का स्वरूप है स्वाहा भी भगवती का ही स्वरूप है और भगवती के माध्यम से क्योंकि मां दुर्गा जगत जननी है तो सभी उनके पुत्र हैं चाहे वह मनुष्य है चाहे वह देवता है स्वाहा से आहुति मां भगवती को समर्पित करते हुए वह भोग और भोजन देवताओं को अर्पण किया जाता है स्वधा भी मां भगवती जगत जननी ही हैं आज के महायज्ञ में ऐसे महत्व को ध्यान रखते हुए संकट मोचन महायज्ञ की आहुति पूर्ण की गई . आज के एक दिवसीय मुख्य यजमान कुलदीप रावल सह पत्नी सपरिवार उपस्थित रहे . विशेष रुप से उपस्थित रोहित प्रियदर्शन, दुष्यंत ठाकुर, पवन मित्तल, पवन रावल, सूरज उपाध्याय, राजू शर्मा आदि .
