70 साल के बुजुर्ग 10 दिन तक वेंटिलेटर पर रहकर कोरोना को हराया

70 साल के रिटायर्ड प्रिंसिपल 17 दिनों तक आईसीयू और 10 दिन तक वेंटिलेटर पर रहकर न केवल कोरोना से जूझते रहे बल्कि जिंदगी बचाने के लिए मौत से लड रहे थे। खुद डाॅक्टर भी उनकी जिंदादिली और बेहतर रिस्पाॅन्स के कायल हो गए। उनकी सेवा में लगे पैरा मेडिकल स्टाफ भी इसे किसी आश्चर्य से कम नहीं मानते हैं।

हम बात कर रहे हैं रिटायर्ड प्रिंसिपल रविंद्र नाथ सिंह की। मूलरूप से बिहार के गया निवासी रविंद्र नाथ सिंह 8 अप्रैल को बेटा और बेटी से मिलने के लिए नोएडा आए। यहां आने के बाद उन्हें ठंड लगी और बुखार सा महसूस हुआ। 13 अप्रैल को परिवार के सभी सदस्य बुखार से पीडित हो गए। 14 को सभी ने आरटीपीआर कराया। इसमें रविंद्र नाथ सिंह और उनके बेटे विनीत कुमार पाॅजिटिव आए जबकि पत्नी और बेटी निगेटिव। हांलाकि इन दोनों में भी कोरोना के लक्षण थे। आक्सिजन लेवल घटने पर 17 अप्रैल को नोएडा के निजी अस्पताल में ले गए। वहां पर सीटी स्कैन किया तो पता चला कि स्कोर 18 था। ऐसे में उन्हें किसी और अस्पताल में ले जाने को कहा गया। 19 अप्रैल को आक्सिजन लेवल 80 होने पर उन्हें शारदा अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां पर उन्हें एचडीयू में रखा गया। हालात गंभीर होने पर आईसीयू में शिफट किया गया। 28 को उनकी हालत काफी बिगड गई। 1 मई को उनका आरटीपीआर निगेटिव आया, इसके बाद भी तकलीफ बनी हुई थी। वह 18 मई की सुबह 10 तक आईसीयू में रहे। इसके बाद उन्हें सामान्य वाॅर्ड में रख दिया गया। इस बारे में बात करने पर खुद रविंद्र नाथ सिंह ने बताया कि कोरोना तो ठीक होना ही था। मुझे इस बात की चिंता नहीं थी। मैं हमेशा पाॅजिटिव रहा, कभी निराश नहीं हुआ। हां सांस लेने में तकलीफ थी। उन्होंने बताया कि यहां के डाॅक्टरों ने बेटे की तरह सेवा की। वाॅर्ड में तैनात अन्य कर्मचारी भी हमेशा सेवा में लगे रहे। उन्हीं का परिणाम है कि आज मैं बिल्कुल स्वस्थ हूं। उन्होंने युवाओं को यह संदेश दिया कि कोरोना से घबराना नहीं है, बल्कि डटकर मुकाबला करना है। जब मैं बुजुर्ग होकर स्वस्थ हो सकता हूं तो जवान बच्चे तो और जल्दी स्वस्थ होंगे। उनके बेटे विनीत कुमार जो वल्र्ड बैंक में कंसलटेंट हैं ने बताया कि डीएम की मदद से उन्हें अस्पताल में बेड मिला। जब एक रात अस्पताल से फोन आया कि आप तुरंत आ जाओ तो मन बहुत घबराने लगा। लगा पिता जी नहीं बचेंगे, लेकिन डाॅक्टरों की मेहनत और भगवान की कपा से वह अब पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं।

इस बारे में शारदा अस्पताल के सीनियर डाॅक्टर डाॅ ए.के गडपाइले ने बताया कि कोरोना होने के बाद उनको निमोनिया हो गया, फिर सांस कमजोर पडने लगी; इसके बाद उनकी सांस की नली काटकर आर्टिफिशल नली (टैकियोटाॅमी) लगाकर उन्हें 10 दिन तक वेंटिलेटर पर रखा। वहां से सुधार होने के बाद उनको जनरल वाॅर्ड में शिफट किया। इसके बाद आर्टिफिशल नली हटाकर नेचुरल नली से ही सांस ले रहे हैं; अगर आदमी हिम्मत न छोड़े तो इस बीमारी को आसानी से हराया जा सकता है।

आज शारदा से दो ऐसे मरीज डिस्चार्ज हुए। इनमें दूसरे हैं डाॅ मुनिंद्र सिंह। सांस कमजोर पडने पर वह 27 अप्रैल को एडमिट हुए। उन्हें भी वेंटिलेंटर सपोर्ट पर रखा गया। हालात सामान्य होने पर उन्हें भी आज डिस्चार्ज कर दिया गया। इसके अलावा 11 अन्य मरीजों को भी स्वस्थ होने पर घर भेज दिया गया।

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