इटली की सहायता से आईटीबीपी में स्थापित हुआ ऑक्सीजन प्लांट 

ग्रेटर नोएडा। लखनावली गांव के पास स्थित इंडियन तिब्बत बार्डर पुलिस (आईटीबीपी) शिविर में संचालित सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) रेफरल अस्पताल के लिए इटली के सहयोग से ऑक्सीजन प्लांट बृहस्पतिवार को शुरू कर दिया गया। एक साथ सौ जवानों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने का यह प्लांट मात्र 48 घंटे में लगाकर चालू कर दिया गया। इटली के भारत में राजदूत विन्सेंजो डी लुका ने सादे समारोह में बटन दबाकर ऑक्सीजन प्लांट का शुभारंभ किया। यह प्लांट प्राकृतिक ऑक्सीजन से ही उत्पादन और आपूर्ति करने में सक्षम है।

आईटीबीपी के प्रवक्ता वीके पांडे ने बताया कि वर्ष 2018 में यहां 200 बेड के अस्पताल का संचालन शुरू हुआ था। अस्पताल में पैरा मिलिट्री, केंद्रीय सशस्त्र बल, सीबीआई, एनएसजी आदि जवानों, सेवानिवृत्त जवानों और उनके परिजन का उपचार किया जाता है। हाल ही में देश को कोरोना से लड़ने में मिल रही मदद की कड़ी में इटली ने ऑक्सीजन प्लांट लगाया है। यह प्लांट इटली से हवाई मार्ग से और दिल्ली से सड़क मार्ग से मंगलवार को यहां लाया गया। प्लांट के साथ इटली के कंपनी के मैकेनिक आदि भी पहुंचे। जिन्होंने मात्र 48 घंटे में प्लांट लगाकर चालू कर दिया।

इधर, लुका बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे यहां पहुंचे उन्होंने कहा कि प्राकृतिक ऑक्सीजन से ही उत्पादन और आपूर्ति करने में सक्षम इस संयंत्र से एक समय में 100 मरीजों को हाई स्पीड ऑक्सीजन मुहैया कराई जा सकती है। इस अवसर पर आईटीबीपी के एडीजी मनोज सिंह रावत ने राजदूत से कहा कि इस संयंत्र की स्थापना के लिए बल उनका आभारी है। वहीं, रेफरल अस्पताल के आईजी मेडिकल डीसी डिमरी ने कहा कि इस प्लांट की स्थापना से अस्पताल की मैन्युअल ऑक्सीजन पर से निर्भरता कम हो जाएगी और मरीजों को सीधे उनके बेड पर आवश्यकतानुसार ऑक्सीजन उपलब्ध होगी। इस मौके पर अस्पताल और इटली के दूतावास और संबंधित कंपनी के अधिकारी भी मौजूद थे।
इटली के 17 पर्यटकों के उपचार को नहीं भूले
लुका ने कहा कि पिछले वर्ष मार्च में इटली के पर्यटक राजस्थान आने के दौरान कोरोना संक्रमित हो गए थे। उनका इलाज दिल्ली में आईटीबीपी के मेडिकल सेटअप पर किया गया था, यह उन्हें हमेशा याद रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत से दोस्ती और एकजुटता हमेशा जारी रहेगी।

सामान्य स्पीड से 200 मरीजों को उपलब्ध हो सकती है ऑक्सीजन

प्रवक्ता ने बताया कि यह प्लांट हाई स्पीड से सौ मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराता है, लेकिन नॉर्मल स्पीड से दो सौ मरीजों को भी ऑक्सीजन उपलब्ध करा सकता है। फिलहाल रेफरल अस्पताल के लिए ही पूर्ण रूप से इस प्लांट की आवश्यकता है, लेकिन रेफरल अस्पताल की जरूरत पूरी होने पर अन्य अस्पताल को भी इससे ऑक्सीजन उपलब्ध कराने पर विचार किया जा सकता है।

 

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