किसान आंदोलन : रास्ता खोलने का काम शुरू, गाजीपुर बॉर्डर से हटाए गए सीमेंट के बैरियर

गाजीपुर बॉर्डर पर रविवार देर रात दिल्ली से गाजियाबाद की ओर से जाने वाले रास्ते को खोलने का काम शुरू हो गया है। दिल्ली- मेरठ हाईवे पर लगी बैरिकेडिंग को हटाया जा रहा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर पुलिस इस मामले में कुछ भी नहीं कह रही है। उधर, किसानों का कहना है कि उनके आह्वान के बाद ही पुलिस इस रास्ते को खोल रही है।

 

भारतीय किसान यूनियन के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने बताया कि दिल्ली पुलिस की ओर से दिल्ली से गाजियाबाद जाने वाले रास्ते की तीन लेन को खोला जा रहा है। किसानों के आह्वान के बाद ही पुलिस ने यह कदम उठाया है। लोगों को हो रही परेशानी के चलते कई दिनों से किसान प्रशासन से इस रास्ते को खोलने की मांग कर रहे थे।

 

उन्होंने बताया कि दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर गाजियाबाद से दिल्ली की ओर जाने वाली सभी लेना अभी भी बंद हैं और यहां पर किसान धरने पर बैठे हुए हैं। वहीं, इस मामले में पुलिस ने आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा है।

किसानों से आह्वान…
इस बीच, यूपी गेट पर रविवार को गाजीपुर किसान आंदोलन कमेटी ने सरकार को कड़ा संदेश दिया। कमेटी के प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा ने आरोप लगाया कि सरकार दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन को समाप्त करने की तैयारी कर रही है। ऐसे में भाकियू ने आंदोलनस्थल पर किसानों की संख्या बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। पदाधिकारियों ने पश्चिमी यूपी और आसपास जिलों के किसानों से 20 अप्रैल तक यूपी गेट बॉर्डर पर पहुंचने का आह्वान किया है।

गाजीपुर किसान आंदोलन कमेटी के प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा ने कहा कि सरकार कई सरकारी संस्थाओं को बेचने में लगी है। साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र साइट-4 की सीईएल कर्मचारी यूनियन कई दिनों से सरकारी की नीति का विरोध कर रही है। इसमें भाकियू पदाधिकारियों ने कर्मचारी यूनियन को समर्थन देकर नीति का विरोध करने की भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि अब कोरोना महामारी पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आपदा को अवसर में बदलने की नीति पर सरकार बहुत सारी कंपनियां बेच रही हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कोरोना की आड़ में किसान आंदोलन समाप्त करने की साजिश की जा रही है। जिस तरह हरियाणा के एक बड़े नेता ने ऑपरेशन क्लीन चलाने की बात कही उससे किसानों में है। लेकिन किसान इसको सफल नहीं होने देंगे। लंबे समय से किसान सड़कों पर बैठे हैं। सरकार के साथ करीब 11 दौर की बातचीत हुई। मगर हर बार सरकार ने सिर्फ किसानों के साथ मजाक किया।

जिद पर अड़े किसान…
किसानों का अब भी यही कहना है कि जब तक सरकार हमारी मांगें नहीं मान लेती तब तब हम लौटने वाले नहीं हैं। किसानों का कहना है कि सरकार भले ही हमारा आंदोलन खत्म करने की साजिश रच रही है लेकिन हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

 

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