ग्राउंड रिपोर्ट: गैर राज्यों से लौट रहे प्रवासी, बढ़ते संक्रमण के बीच खतरे की घंटी न बन जाएं

कोरोना का संक्रमण एक बार फिर से पांव पसार चुका है जिससे यूपी के अलावा गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी हड़कंप सी स्थिति है। इस कारण बड़ी संख्या में इन राज्यों से लोग लौट रहे हैं। कुछ तो जिले के हैं और कुछ आगे निकल रहे हैं लेकिन कहीं पर भी इनकी जांच की कोई सुविधा नहीं है।

एक खानापूरी के नाम पर रेलवे स्टेशन को छोड़ दें तो हाईवे के रास्ते से लौटने वाले प्रवासी राम भरोसे हैं। बसों, कारों व ट्रकों से आने वाले प्रवासियों की जांच की कहीं कोई सुविधा न तो जिले में शुरू की गई है और न ही सीमाओं पर किसी तरह की चेकिंग चल रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में कोरोना का संकट कम होने के बजाय बढ़ता ही नजर आ रहा है।

फैक्टरी से निकलते वक्त हुई थी जांच
सूरत की एक फैक्टरी से मजदूरों को लेकर कानपुर जा रही बस के ड्राइवर आपाधीगा को जब हाईवे पर रोककर बात की गई तो उसने बताया कि सिर्फ निकलते वक्त मजदूरों की चेकिंग की गई थी। इसके बाद सफर में कहीं बस रोककर यात्रियों की फिलहाल कोई चेकिंग नहीं की गई। कुछ के पास जांच के कागज है तो कुछ के पास नहीं है। फिलहाल सभी को कानपुर छोड़ना है।

ऑटो लेकर निकले तो रोकेगा कौन
मुंबई से वाराणसी के लिए ऑटो से निकले तीन दोस्तों दुर्गेश, श्री प्रकाश और बादल ने बताया कि वहां पर उनका होटल था। हालात खराब हुए तो होटल भी बंद करना पड़ा। एक बार लौट चुके हैं फिर दोबारा से कामकाज समेट कर वापस आना पड़ रहा है। ऑटो से चार-पांच दिन हो चुके हैं। कहीं पर भी रास्ते में न तो पुलिस की कोई चेकिंग मिली और न ही किसी ने कोरोना जांच के लिए रोक टोक की।

रोडवेज बसों में भी ठूंसी जा रही हैं सवारियां
भले ही यूपी सरकार कोरोना के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंतित हो लेकिन परिवहन विभाग फिलहाल बेफिक्र लगता है। हालात यह है कि कानपुर-झांसी जाने वाली सभी बसों में यात्रियों की भीड़ कभी भी देखी जा सकती है। एक सीट पर तीन से चार लोग नजर आते हैं। कोई मास्क तो कोई बिना मास्क बैठा दिखाई देता है। बस में आखिरी मर्तबा सैनिटाइजेशन कब हुआ था, चालक परिचालकों को इसकी जानकारी नहीं। अलबत्ता कहीं यात्रियों की संख्या न कम रह जाए, इसकी चिंता जरूर दिखती है।

 

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