आज़ादी की लड़ाई मे शामिल रहे है मुख़्तार के दादा, अंसारी के नाम है दिल्ली मे एक रोड

मुख़्तार अंसारी के बारे मे बताते है आपको लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजनीति में जब भी बाहुबली नेताओं की गिनती की जाती है उसमें मुख्तार अंसारी का नाम जरूर आता है. मुख्तार अंसारी पर 13 से ज्यादा मुकदमें दर्ज हैं और वह पिछले 14 सालों से जेल में बंद है. साथ ही मुख्तार यूपी की मऊ विधानसभा सीट से लगातार पांचवीं बार विधायक चुने गए है मुख्तार अंसारी की पहचान माफिया डॉन के रूप में भी है. आइये जानते हैं इस बाहुबली के बारे में कुछ ख़ास बातें…

1. डॉ मुख्तार अहमद अंसारी मुख्तार के दादा थे. डॉ साहब स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान 1926-27 में इंडियन नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष रहे. ऐसा भी बताया जाता है कि वे महात्मा गांधी के बहुत करीबी हुआ करते थे. डॉ मुख्तार अहमद अंसारी के नाम से दिल्ली में एक रोड भी है.

2. ब्रिगेडियर उस्मान मुख्तार अंसारी, बाहुबली मुख्तार अंसारी के नाना थे. ब्रिगेडियर साहब ने साल 1947 की लड़ाई में भारतीय सेना की ओर से नवशेरा की लड़ाई में हिस्सा लिया और देश को जीत दिलाने के लिए शहीद भी हुए. उन्हें भारत सरकार द्वारा महावीर चक्र से सम्मानित किया गया.

3. भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी आपको अच्छे से याद होंगे. हामिद अंसारी रिश्ते में मुख्तार के चाचा लगते हैं.

4. मुख्तार के बेटे का नाम है अब्बास अंसारी. अब्बास शॉट गन शूटिंग के इंटरनेशनल खिलाड़ी हैं. साथ ही वह शॉट गन शूटिंग में नैशनल चैंपियन भी रह चुके हैं.

5. साल 2005 के अक्टूबर महीने में मऊ में दंगा हुआ था. मुख्तार पर इस दंगे को भड़काने का आरोप लगा. इसी मामले में मुख्तार ने गाजीपुर पुलिस के सामने सरेंडर किया था. मुख्तार को गाजीपुर जेल में रखा गया. इसके बाद उन्हें मथुरा जेल भेज दिया गया. मथुरा से आगरा जेल और फिर आगरा से बांदा जेल भेजा गया.

6. मुख्तार अंसारी पर चल रहे आपराधिक मुकदमों की कहानी बहुत लंबी है. इन आपराधिक घटनाओं से कई सारे किस्से जुड़े हुए है. मुख्तार का मुख्य रूप से मऊ, गाजीपुर, वाराणसी और जौनपुर में दबदबा माना जाता है. इन जिलों में ठेकेदारी, खनन, स्क्रैप, शराब और रेलवे ठेकेदारी में अंसारी का कब्जा माना जाता है.

7. साल 1988 में पहली बार एक हत्या के मामले में मुख्तार अंसारी का नाम आया था. लेकिन पुलिस उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं जुटा पाई थी. मुख्तार ने साल 1995 में राजनीति की दुनिया में कदम रखा और साल 1996 में मऊ विधानसभा सीट से विधायक बना.

8. पूर्वांचल के इन हिस्सों में मुख्तार अंसारी के अलावा ब्रजेश सिंह की भी दबंगई चला करती थी. मुख्तार और ब्रजेश गैंग के बीच कई छोटी-बड़ी गैंगवार हुई. एक ऐसी ही गैंगवार में ब्रजेश सिंह के मारे जाने की भी खबर आई. लेकिन कुछ सालों बाद ब्रजेश जिंदा पाया गया. साल 2008 में उसे उड़ीसा से गिरफ्तार किया गया.

9. मुख्तार अंसारी साल 2007 में बहुजन समाज पार्टी(बसपा) में शामिल हो गए. सपा प्रमुख मायावती ने मुख्तार को रॉबिनहुड के रूप में पेश किया था. मुख्तार बसपा के टिकट पर वाराणसी से 2009 का लोकसभा चुनाव लड़ा मगर वह भाजपा के मुरली मनोहर जोशी से हार गया. साल 2010 में मुख्तार और उसके भाई अफजल अंसारी को बसपा से निष्कासित कर दिया गया.

10. इसके बाद तीनों अंसारी भाइयों मुख्तार, अफजल और सिब्गतुल्लाह ने साल 2010 में ‘कौमी एकता दल’ नाम से राजनीतिक पार्टी का गठन किया. 2014 के लोकसभा चुनाव में मुख्तार ने घोसी के साथ-साथ वाराणसी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ खड़ा होने की घोषणा की थी. लेकिन चुनाव के पहले उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली.

 

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