Interview: ‘साइलेंस’ के साथ धमाकेदार वापसी से ख़ुश प्राची देसाई बोलीं- ‘मनोज बाजपेयी के साथ एक फ़िल्म करना काफ़ी नहीं’

 दिल्ली। छोटे पर्दे पर ‘कसम से…’ धारावाहिक से अभिनय का करियर शुरू करने वाली एक्ट्रेस प्राची देसाई ने टीवी पर भले ही बहुत लम्बा समय ना बिताया हो, मगर लोकप्रियता ख़ूब बटोरी। शायद यही वजह है कि फ़िल्मों के लिए टीवी छोड़ चुकीं प्राची आज भी टीवी के दर्शकों को बेस्ट मानती हैं। प्राची ने 26 मार्च को Zee5 पर रिलीज़ हुई सस्पेंस-थ्रिलर फ़िल्म से लम्बे ब्रेक के बाद एक्टिंग में वापसी की है और फ़िलहाल इसकी कामयाबी का लुत्फ़ उठा रही हैं। जागरण डॉट कॉम से एक्सक्लूसिव बातचीत में प्राची ने अपने लम्बे ब्रेक और भावी योजनाओं पर बातचीत की।

‘लम्बा ब्रेक लेने का कोई प्लान नहीं था’

प्राची आख़िरी बार 2016 में रिलीज़ हुई रॉक ऑन 2 में नज़र आयी थीं। इसके बाद 2017 में एक शॉर्ट फ़िल्म कार्बन की। लगभग 5 साल का लम्बा ब्रेक लेने के पीछे वजह का खुलासा करते हुए प्राची ने कहा कि मैंने 17 साल की उम्र से एक्टिंग शुरू कर दी थी। कुछ वक़्त बाद मुझे ऐसा लगा कि अब अलग तरह के किरदार करने भी ज़रूरी हैं। विविधतता लाना ज़रूरी है। मुझे एक ही क़िस्म के रोल ऑफ़र हो रहे थे। थोड़ा ठहराव महसूस होने लगा था। इसीलिए मैंने तय किया कि कुछ अलग करना चाहती हूं। मगर, एक्टर्स की लाइफ़ में अक्सर ऐसा होता है कि पता नहीं होता, कब मिलेगा। आज मिलेगा या तीन महीने या छह महीनों बाद। इतना लम्बा ब्रेक लेने कोई प्लान नहीं था। मगर, जब साइलेंस- कैन यू हियर इट? ऑफ़र हुई तो स्क्रिप्ट सुनकर ही तय कर लिया था कि यह फ़िल्म मुझे करनी ही है। ऐसे ही रोल करना चाह रही थी।

मनोज बाजपेयी के साथ एक फ़िल्म काफ़ी नहीं’

साइलेंस में प्राची ने एसीपी अविनाश वर्मा की टीम में इंस्पेक्टर संजना भाटिया का किरदार निभाया है। साइलेंस की रिलीज़ के आस-पास ही मनोज बाजपेयी को भोंसले के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड घोषित हुआ था। प्राची कहती हैं कि उनके व्यवहार से बिल्कुल नहीं लगता कि आप राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता एक्टर के साथ काम कर रहे हैं- ”मनोज सर के साथ काम करना ख़ुशी की बात है। हर एक्टर का ड्रीम होता है कि उनके जैसे कलाकारों के साथ कभी ना कभी काम करने का मौक़ा मिले। बहुत कुछ सीखने को मिलता है, पर अब लगता है कि एक फ़िल्म तो करना काफ़ी नहीं है। उनके साथ ख़ूब फ़िल्में करनी होंगी। फ़िल्मों को लेकर जितनी समझ उनकी है, उसको सीखने में ज़िंदगी निकल जाएगी।

एक बेहतरीन इंसान हैं। मुझे सेट पर जाने से पहले बिल्कुल पता नहीं था कि उनका नेचर कैसा होगा? हम उन्हें इतनी सीरियस और इंटेंस फ़िल्मों में देखते हैं। लेकिन, असल ज़िंदगी में बहुत मज़ाकिया भी हैं। सबको एक टीम की तरह रखते हैं। उन्होंने हमारा काम बेहद आसान कर दिया, क्योंकि फ़िल्म में हमें एक टीम की तरह दिखना था और पहले दिन से ही उन्होंने हमें इतना कम्फर्टेबल महसूस करवाया कि टीम की तरह ही लगने लगा। उनके व्यवहार से बिल्कुल नहीं लगता कि आप नेशनल अवॉर्ड विनर एक्टर के साथ काम कर रहे हैं। हालांकि, उनकी डांट भी हमें पड़ी थी। हम लोग बहुत हंसी-मज़ाक करते थे तो डांटते भी थे।”

‘ओटोटी प्लेटफॉर्म्स की वजह से विविधता आयी’

प्राची ओटीटी बूम के इस दौर को जमकर एक्सप्लोर करना चाहती हैं- ”बेहतरीन फेज़ चल रहा है, क्योंकि इस समय सबको ख़ूब मौक़े मिल रहे हैं। चाहे लेखक हों, डायरेक्टर हों, एक्टर हों। ओटीटी पर अलग-अलग चीज़ों के साथ एक्सपेरीमेंट कर सकते हैं तो एक्टर्स को भी फ़िल्म या वेब सीरीज़ में कुछ अलग करने का मौक़ा मिल रहा है। बड़े पर्दे की फ़िल्मों में एक सेट फॉर्मूला को फॉलो किया जाता है। उसी पैटर्न पर चलते रहे हैं, क्योंकि वही चल रहा होता है। ओटीटी में ऐसा नहीं है। अब अलग-अलग चीजे़ं कर सकती हूं, इसके लिए एक्साइटेड हूं। अब जो भी रोल्स आ रहे हैं, वो उसी तरह के हैं, जैसा मैं करना चाह रही थी।”

‘बिज़नेस माइंडेड नहीं हूं’ 

प्राची ने रॉक ऑन के लिए छोटे पर्दे को अलविदा कहा था। बोल बच्चन और अज़हर जैसी फ़िल्मों में उन्होंने अहम किरदार निभाये। जब प्राची से पूछा गया कि साइलेंस जैसी फ़िल्म बड़े पर्दे पर रिलीज़ होनी चाहिए थी तो उन्होंने कहा- ”बतौर एक्टर मैं मीडियम में अंतर नहीं करती। मैं उतनी बिज़नेस माइंडेड नहीं हूं। मुझे बस अच्छे रोल करने से मतलब है। दोनों मीडियम्स के लिए उतनी ही रेस्पेक्ट है। फ़िलहाल तो यही स्मार्ट डिसीज़न है कि ओटीटी पर ज़्यादा से ज़्यादा रिलीज़ किये जाएं। साइलेंस बड़े पर्दे पर देखने में भी मज़ा आता, मगर ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अपनी सुविधा के अनुसार फ़िल्म देख सकते हैं।

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