अनोखी सजाः छेड़छाड़ का आरोपी नशा मुक्ति केंद्र में एक महीने करेगा सेवा

Delhi Crime News: आदेश का पालन हो, इसके लिए संबंधित केंद्र से जारी सर्टिफिकेट अदालत में जमा कराने का निर्देश भी दिया गया। अदालत ने सामुदायिक केंद्र से कहा कि वह आरोपी की ओर से किसी भी तरह की गैरहाजिरी या बुरा बर्ताव नजर आने पर तुरंत इसकी शिकायत संबंधित एसएचओ से करे।

दिल्ली हाई कोर्ट ने महिला से छेड़छाड़ के एक आरोपी को अनोखे अंदाज में उसके अपराध का बोध कराने की कोशिश की। अदालत ने आरोपी के खिलाफ केस रद्द किए जाने की मंजूरी तो दे दी, पर इस निर्देश के साथ कि वह एक महीने तक एक नशा मुक्ति केंद्र में सामुदायिक सेवा करेगा।

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने आरोपी विक्रमजीत सिंह को निर्देश दिया कि वह दरियागंज स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र में एक महीने तक सामुदायिक सेवा (कम्युनिटी सर्विस) करे। यह केंद्र ‘सोसायटी फॉर प्रमोशन ऑफ यूथ एंड मासेस’ चलाता है। सिंह को यहां 1 अप्रैल से सेवा शुरू करने को कहा गया जो उसे 30 अप्रैल तक लगातार करनी है। आरोपी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगा है। इसमें से 25 हजार रुपये डीएचसीबीए के लॉयर्स सोशल सिक्योरिटी एंड वेलफेयर फंड और 25 हजार रुपये निर्मल छाया फाउंडेशन को दिए जाएंगे। बाकी बचे 50 हजार रुपये आर्मी वेलफेयर फंड बैटल कैजुअल्टीज में जमा कराए जाने का निर्देश है।

आदेश का पालन हो, इसके लिए संबंधित केंद्र से जारी सर्टिफिकेट अदालत में जमा कराने का निर्देश भी दिया गया। अदालत ने सामुदायिक केंद्र से कहा कि वह आरोपी की ओर से किसी भी तरह की गैरहाजिरी या बुरा बर्ताव नजर आने पर तुरंत इसकी शिकायत संबंधित एसएचओ से करे। पुलिस अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई कि वह ऐसी किसी शिकायत मिलने की जानकारी अदालत तक पहुंचाएं और संबंधित आदेश वापस लेने की मांग करें।

हाई कोर्ट ने सिंह की याचिका पर यह आदेश पारित किया। उसने विकासपुरी थाने में अपने खिलाफ छेड़छाड़ और धमकाने के आरोपों में दर्ज केस को रद्द करने की मांग की थी। दावा किया कि शिकायतकर्ता और उसने आपस में मामले को सुलझा लिया है। तर्क दिया कि ऐसे में 15 जुलाई 2020 में दर्ज इस केस में कार्यवाही को आगे बढ़ाने से अब कोई मकसद सिद्ध नहीं होगा। अदालत ने शिकायत और साक्ष्यों पर गौर किया। कहा कि याचिकाकर्ता बहुत ही क्रूर तरीके से बर्ताव करता हुआ नजर आ रहा है।

सीसीटीवी फुटेज से ही जाहिर है कि याचिकाकर्ता ने छेड़छाड़ और धमकाने के अपराध किए। घटना के चश्मदीद भी हैं। लेकिन, चूंकि शिकायतकर्ता अपनी शिकायत पर कार्यवाही को आगे बढ़ाना नहीं चाहती, इसीलिए अभियोजन को जारी रखना व्यर्थ होगा। इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने आवेदन मंजूर कर लिया। जस्टिस प्रसाद ने कहा कि तथ्यों और याचिकाकर्ता के आचरण को देखते हुए अदालत चाहती है कि आरोपी को उसके पापों का प्रायश्चित कराने के लिए सामुदायिक सेवा का निर्देश दिया जाए। उसे भविष्य में ऐसी हरकतें न दोहराने की चेतावनी भी दी गई।

 

 

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