मिलिए गीतांजलि रॉव से जो 15 साल की सबसे युवा वैज्ञानिक बन गयी, पढें पूरी कहानी

बचपन में हम बहुत से सपने देखते है पर पुरे वही होते है , जिसके लिए हम लगन और मेहनत से काम करते है। जिस उम्र में बच्चे मोबाइल और टीवी पर वीडियो गेम देखते है गीतांजली राव ने वो कर दिखाया जिसकी हम कल्पना नहीं कर सकते। आइये जानते है कौन है ये गीतांजली राव।

कौन है गीतांजली –

गीतांजलि का जन्म 19 नवम्बर 2005 को हुआ। गीतांजली भारतीय मूल की रहने वाली है , लेकिन इनके परिवार के लोग अमेरिका में जाकर बस गए तो इनका जन्म अमेरिका में हुआ। इनकी पढाई भी अमेरिका में हो रही है। साल 2020 में गीतांजलि को किड ऑफ द ईयर 2020 के खिताब से नवाजा गया।

जिसने बदला गीतांजली का जीवन –

कुछ समय पहले अमेरिका में पानी को लेकर क्राइसेस चल रहा था , पुरे अमेरिका के पानी में काँच जैसा कुछ तरल पदार्थ निकलने लगा। जिसकी वजह से लोगों की पिने के पानी की परेशानी बढ़ गयी। उस समय गीतांजली की उम्र मात्र 12 साल थी और तब गीतांजली ने सोचा की मैं एक ऐसा यंत्र बनाउंगी जिससे इस तरल पदार्थ को निकला जा सके। जिससे में लोगों की हेल्प कर सकूँ। गीतांजली एक इंटरव्यू में बताती है कि जब यह क्राइसेस हुआ था तो उनकी माँ पानी की जाँच करने के लिए एक छोटा सा यंत्र का प्रयोग कर रहीं थी। यह सब देखकर गीतांजली को एक यंत्र बनाने का मन हुआ। गीतांजली ने तुरंत ही अमेरिका की एक पानी पर रिसर्च करने वाली कंपनी से संपर्क कर अपने आईडिया को साँझा किया। यह आईडिया उस कंपनी के लोगो को बहुत पसंद आया।

ऐप से पता लगेगा पानी में सीसा है या नहीं –

इस उपकरण को कहीं भी ले जाया जा सकता है। इस उपकरण की सबसे अच्छी बात ये है कि इसे अपने स्मार्टफोन में एक ऐप से जोड़कर ही पानी में लीड यानी सीसा का पता लगाया जा सकता है। गीतांजलि ने उपकरण का नाम शुद्ध जल की ग्रीक देवी ‘टेथीज़’ के नाम पर रखा है। गीतांजलि अपने काम को और आगे बढ़ाना चाहती हैं। गीतांजलि को अवॉर्ड के साथ 25 हज़ार डॉलर यानी 16.22 लाख रुपये की राशि भी दी गई है।

5 हजार में से चुनी गईं-

गीतांजली का चयन टाइम ने 5 हजार नामांकितों में से किया है। वे पहली व्यक्ति हैं जिन्हें किड ऑफ द ईयर का खिताब मिला है। टाइम स्पेशल के लिए उनका इंटरव्यू एक्टर और कार्यकर्ता एंजोलीना जोली ने लिया। इस वर्चुअल इंटरव्यू में गीतांजली ने बताया उनके काम करने के तरीके में अवलोकन, दिमागी कसरत, शोध, निर्माण और संवाद की प्रमुख भूमिका होती है। एक अंग्रेजी बेवसाइट से बात करते हुए गीतांजलि ने कहा कि ये एक्सपेरिमेंट करते वक्त मैं कई बार फेल हुई। कई बार फेलियर की वजह से गुस्सा भी आया लेकिन मुझे पता था ये मेरे सीखने का ही वक्त है और ऐसे ही मैं अपने उपकरण को तैयार कर सकती हूं।

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